थानों में नहीं टिकने दे रहे टीआई

Betulwani Expose:बैतूल। पिछले कुछ महीनोंं से पुलिस विभाग में कम समय के भीतर ही थाना प्रभारियों को जिले में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने की परम्परा सी डल गई है। एक थाने में पहुंचकर क्षेत्र की स्थिति समझने के पहले ही उस थाना प्रभारी को दूसरे थाने का आदेश दे दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति कल भी निर्मित हुई है जब जिले के चार प्रमुख थानों के थाना प्रभारियों को कुछ महीने के भीतर ही दूसरे थानों में भेज दिया गया है। बैतूल एसपी वीरेन्द्र जैन ने कल 27 नवम्बर को एक आदेश जारी किया जिसमें आमला थाना प्रभारी राजेश सातनकर को भैंसदेही, शाहपुर थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर को आमला, रक्षित केंद्र में पदस्थ टीआई देवकरण डहेरिया को शाहपुर, भैंसदेही थाना प्रभारी सरविंद धुर्वे को रक्षित केंद्र में पदस्थ किया है। बैतूलवाणी ने जब इस संबंध में इन चारों थाना प्रभारियों की पदस्थापना को लेकर जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि इसमें किसी का एक माह तो किसी का ढाई महीने में जिले में ही एक थाने से दूसरे थानों में तबादला हो रहा है।
सातनकर के 20 माह में 5 तबादले

चंबल क्षेत्र के भिंड से मार्च 2024 में बैतूल आए टीआई राजेश सातनकर को पहला थाना मुलताई मिला था जहां 10 माह पदस्थ रहने के बाद उन्हें लाईन अटैच कर दिया गया। 15 दिन लाईन में रहने के बाद उन्हें चोपना थाना प्रभारी बनाया गया जहां उनकी पदस्थापना मात्र 4 महीने रही, इसके बाद उनका तबादला आमला कर दिया गया, वहां भी उन्हें तीन महीने में ही दूसरी जगह भैंसदेही थाने के रूप में कल नई जिम्मेदारी दी गई है। अब देखना यह है कि भैंसदेही में कितने दिन रखा जाएगा।
27 माह में 6 बार बदली डहेरिया की जिम्मेदारी

सिवनी से 4 अगस्त 2023 को बैतूल आए टीआई देवकरण डहेरिया का दो साल में बैतूल जिले के अंदर ही 6 बार तबादला हो चुका है। उनकी पहली पदस्थापना बैतूल गंज थाने में की गई थी जहां 6 माह में उनका तबादला बैतूल कोतवाली कर दिया था,यहां पर 9 माह पदस्थ रहने के बाद उन्हें सारनी थाना प्रभारी बनाया गया था, यहां भी मात्र ढाई महीने बाद ही उनका तबादला मुलताई कर दिया गया। मुलताई में 9 माह पदस्थ रहने के बाद उन्हें लाईट अटैच कर दिया गया, जहां एक माह रहने के बाद कल उन्हें शाहपुर थाने भेज दिया गया है। इस तरह से उन्हें पूरे जिले के हर कोने के थाने में भेजा जा रहा है।
सरविंद धुर्वे का जिले के 8 थानों में तबादला

भैंसदेही थाना में पदस्थ टीआई सरविंद धुर्वे को लाईन अटैच किया गया है। श्री धुर्वे सितम्बर 2021 में बालाघाट से बैतूल आए थे। उनकी पहली पदस्थापना बीजादेही थाने में हुई, 8 माह बाद इनका तबादला रानीपुर थाना किया गया, यहां से 7 माह बाद ट्रेफिक में भेज दिया। यहां से 6 माह बाद बोरदेही थाना, यहां से 7 माह बाद आठनेर थाना फिर 7 माह बाद चोपना थाना, यहां भी 7 माह की पदस्थापना के बाद बैतूल गंज जैसे महत्वपूर्ण थाने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन एक माह में ही उनसे यह जिम्मेदारी ले ली और भैंसदेही भेज दिया गया जहां 4 माह बाद उनको लाईन अटैच कर दिया गया।
6 वी बार हुआ ठाकुर का तबादला

शाहपुर थाने में पदस्थ मुकेश ठाकुर का तबादला आमला कर दिया गया है। श्री ठाकुर बालाघाट से 2022 में बैतूल आए थे और उनको सबसे पहले बोरदेही थाने की जिम्मेदारी दी गई थी। 8 माह बाद उनका तबादला अजाक थाने कर दिया गया था। यहां 9 महीने तक सेवाएं देने के बाद उन्हें साईखेड़ा थाना भेजा गया। यहां 5 माह बाद उन्हें हटा दिया गया था, लेकिन दोबारा फिर इन्हें साईखेड़ा थाने भेजा जहां 9 महीने रहे। इसके बाद उनका तबादला शाहपुर किया गया जहां 14 महीने की पदस्थापना के बाद कल आमला थाने की नई जिम्मेदारी दी गई है। अब देखना है कि श्री ठाकुर आमला थाने में कितने दिन रहेंगे।
राजनीति के हो रहे शिकार
पुलिस विभाग में कम समय में बार-बार हो रहे तबादलों को लेकर राजनैतिक और प्रशासनिक हल्कों में जो चर्चा हो रही है उससे सत्तारू ढ भाजपा के कई जनप्रतिनिधियोंं के बेजा हस्तक्षेप को कारण माना जा रहा है। यह भी चर्चा हो रही है कि उन क्षेत्रों के कुछ छुटभैय्या नेता जो कई तरह के अनैतिक कार्यों में लिप्त रहते हैं वे थाना प्रभारियों के हस्तक्षेप से प्रभावित होते ही उन्हें हटाने के लिए अपने आकाओं पर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं। इससे जिले की ला एंड आर्डर की स्थिति भी प्रभावित हो रही है जिसको लेकर सत्तारूढ दल के वरिष्ठ नेताओं को ध्यान देना होगा।
यह कोई बड़ी बात नहीं है: एसपी

कल जिले के चार थानों के प्रभारियों के तबादले होने को लेकर सांध्य दैनिक बैतूलवाणी ने कम समय में तबादला होने के सवाल को लेकर बैतूल एसपी वीरेन्द्र जैन से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि इसमें हमने कार्य की समीक्षा की थी और उस हिसाब से प्रशासनिक कसावट के लिए काम किया है। ये कोई चीज नहीं है, सब लोकल के विषय है ऐसा भी नहीं है कि बहुत टाईम लगता है। टीम तो वहीं रहती है, भौगोलिक स्थिति पहचानने में ज्यादा टाईम नहीं लगता है और ना ही कर्मचारियों को पहचानने में टाईम लगता है, यह कोई बड़ी बात नहीं है।
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