महंगाई, बैंक लोन और परिवार पालन बना चुनौती
Challenge: आठनेर। मक्का और मटर के वर्तमान दामों ने किसानों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी। मंडियों में मक्का 15 सौ और मटर 15 से 20 रूपए किलो बिक रहा है। जिससे किसान की लागत तक नहीं निकल पा रही हैं। जिले में सर्वाधिक मटर उत्पादक क्षेत्र आठनेर और भैंसदेही माना जाता है सबसे अधिक मटर की बुवाई सातनेर धामनगांव, गुदगांव, काटोल, बालनेर, में की गई यहां का मटर महाराष्ट्र के मंडी परतवाड़ा, अमरावती, आकोट, अंजनगांव, सहित मंडियों में पहुचता है। परन्तु वर्तमान में किसानों का मटर 15 रूपए से 20 रूपए किलो बिक रहा है। जिससे उत्पादन की लागत तक नहीं निकल पा रही है। किसानों ने बताया कि 250 रूपए किलो का बीज, 250 रूपए मटर तोड़ाई की दैनिक मजदूरी,मंडी भाड़ा सहित खर्च की बात करें तो किसान के हाथों में कौड़ी के दाम आ रहें हैं।

40 प्रतिशत किसानों की मक्का खेतों में
मक्का के वर्तमान गिरते दामों से भी किसान ख़ासे परेशान हैं क्षेत्र में आज भी 40 प्रतिशत किसानों ने मक्का की दावन नहीं की और मक्का के बढ़ते दाम के चक्कर में भुट्टे खलियानों में पड़े हैं। निराश किसानों की मानें तो वर्तमान में चल रहे मक्का के दामों से केवल लागत की भरपाई हो सकती है। मक्का का पुरा उत्पादन कर्ज चुकाने में खत्म हो रहा है हाथों में कुछ नहीं आ पा रहा है। मक्का और मटर के उत्पादन के बाद गिरे दामों से किसान पुरी तरह आर्थिक स्थिति से कमजोर हो चुका।
किसानों के साथ खड़ा आर्थिक संकट

अब अगर हम बात करें तो मध्यम वर्ग और लघु सीमांत किसानों के लिए एक वर्ष चुनौती पूर्ण रहने वाला है। किसानों ने महंगे बीज का चयन और लागत की खेती कर मक्का और मटर का भरपूर उत्पादन निकाला परन्तु गिरते दामों के ऐवरेज अनुसार लागत तक नहीं निकल पाई। परन्तु वर्तमान में मार्केट में चल रही मंहगाई एक चुनौती है। अब किसान को एक वर्ष अपने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई,परिवार में विवाह कार्यक्रम, बैंकों से लिया कर्ज चुकाने और आने वाली खरीब की पुन: बुवाई एक बड़ी चुनौती है।
आर्थिक नुकसान झेल रहे किसान
अगर सही मायने में बात करें तो वास्तविक अन्नदाता पूरी तरह कमजोर हो चुका है। उसे वर्तमान समय में मार्केट की मंहगाई और कृषि में लगने वाली लागत एक बड़ी चुनौती है। किसानों को अब मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में पेश होने वाले बजट से उम्मीद है कि एमएसपी के आसपास मक्का सहित अनाजों की खरीदीं, महंगे खाद बीज दवाईयों की दरों में कमी, कृषि उपकरणों की दरों में कटौती, कृषि लोन में सुविधा, और कृषि सम्बन्धी उन सभी चीजों में कटौती होने पर ही किसानों की हालत में सुधार होगा।
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