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Darshan system: महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर अब लाइव निगरानी

महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर अब

अब पता चलेगा—कौन लाया खास मेहमान, कितने लोग पहुंचे दर्शन को

Darshan system: उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को अब और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी निगरानी शुरू कर दी गई है। मंदिर प्रशासन ने एक नई डिजिटल प्रणाली लागू की है, जिसके तहत हर वीआईपी श्रद्धालु के आगमन, दर्शन और एग्जिट की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के निर्देशन में लागू इस व्यवस्था में अब कोई भी वीआईपी श्रद्धालु जब मंदिर पहुंचेगा, तो उसकी जानकारी शंख द्वार पर तैनात कर्मचारियों द्वारा गूगल डॉक्स में दर्ज की जाएगी। यह डेटा सीधे मंदिर प्रशासक और सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के मोबाइल पर लाइव दिखाई देगा।

📋 अब रिकॉर्ड में रहेगा हर विवरण

  • श्रद्धालु कब और किस गेट से मंदिर पहुंचे।
  • कितने लोगों के साथ आए और दर्शन में कितना समय लगा।
  • किसने प्रोटोकॉल दर्शन के लिए अनुरोध किया।
  • क्या सभी नामित व्यक्तियों ने दर्शन किया या अतिरिक्त लोग शामिल थे।
  • वीआईपी को रिसीव किसने किया और प्रोटोकॉल प्रक्रिया में कौन-कौन कर्मचारी रहे।

तीन स्तरों पर चेकिंग और मोबाइल पर लाइव फीड की व्यवस्था की गई है। अधिकारी किसी भी समय पूरे दिन की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर सकते हैं।

🎯 तकनीकी निगरानी से मिले सकारात्मक परिणाम

सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के अनुसार, अक्टूबर के पहले सप्ताह से यह प्रणाली प्रभावी रूप से काम कर रही है और अब तक सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। इस व्यवस्था से अवैध वसूली और अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगी है।

⚠️ गड़बड़ियों पर लगाम लगाने की जरूरत

महाकाल मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इनमें कई वीआईपी वर्ग के होते हैं, जिन्हें विशेष प्रोटोकॉल के तहत नंदी हॉल या जलद्वार तक जाने की अनुमति होती है।
हालांकि पिछले सालों में इस व्यवस्था में कई बार अनियमितताएं और अवैध वसूली के मामले सामने आए थे।

करीब 10 महीने पहले मंदिर में एक अवैध वसूली रैकेट पकड़ा गया था, जिसमें श्रद्धालुओं से ₹1100 से ₹2000 तक वसूले जाते थे। जांच में 13 लोगों पर FIR दर्ज की गई थी और 6 कर्मचारियों को निलंबित किया गया।

💡 प्रशासन का उद्देश्य

मंदिर समिति ने अब प्रोटोकॉल दर्शन को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। इसका उद्देश्य—

  • भ्रष्टाचार पर रोक लगाना,
  • श्रद्धालुओं को सुगम और निष्पक्ष दर्शन सुविधा देना,
  • और मंदिर प्रशासन की साख को मजबूत करना है।
  • साभार…

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