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Gazette Notification: नाम बदलने के गजट नोटिफिकेशन में बढ़ी परेशानी: 7 दिन की जरूरत, 60 दिन में मिल रहा प्रमाण

नाम बदलने के गजट नोटिफिकेशन में

Gazette Notification: आधार, पैन, पासपोर्ट और मार्कशीट जैसे जरूरी दस्तावेजों में नाम परिवर्तन के लिए गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य है, लेकिन इसकी प्रक्रिया अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। स्थिति यह है कि कई मामलों में लोगों को 7 दिन के भीतर गजट की जरूरत होती है, लेकिन उन्हें 45 से 60 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

गजट नोटिफिकेशन जारी करने की जिम्मेदारी गवर्नमेंट प्रेस के पास है, जिसका प्रदेश में एकमात्र कार्यालय भोपाल में है। नाम बदलने के लिए आवेदन तो ऑनलाइन होते हैं, लेकिन सिस्टम से कोई जवाब नहीं मिलने के कारण आवेदकों को भोपाल जाकर फिजिकल सेट जमा करना पड़ता है।

5 साल में आवेदन 5 गुना बढ़े, स्टाफ कम

हर महीने करीब 1200 आवेदन गजट अधिसूचना के लिए आते हैं, जिनमें से 90% नाम बदलने से जुड़े होते हैं। बढ़ती संख्या के बावजूद प्रेस में स्टाफ बेहद कम है—जहां पहले 8 DTP ऑपरेटर थे, अब केवल 2 बचे हैं।
इसी कारण एक हफ्ते में केवल 50–70 अधिसूचनाएं ही जारी हो पाती हैं, जिससे आवेदकों को दो महीने का इंतजार करना पड़ रहा है।

गजट जारी होने से पहले की प्रक्रिया

  • 200 रुपए का शपथ पत्र
  • दो अखबारों में नाम परिवर्तन की सूचना
  • गजट प्रकाशन शुल्क 400 रुपए
    गजट जारी होने पर इसकी आधिकारिक प्रति ई-गजट पोर्टल से डाउनलोड की जा सकती है, लेकिन अधिकांश विभाग सर्टिफाइड कॉपी मांगते हैं, जिसके लिए फिर से आवेदन और इंतजार करना पड़ता है।

नियम स्पष्ट नहीं, समय सीमा तय नहीं

गजट नोटिफिकेशन कितने दिनों में जारी होना चाहिए, इसकी कोई स्पष्ट समय सीमा निर्धारित नहीं है। पहले भोपाल के साथ ग्वालियर, इंदौर और रीवा में भी प्रेस कार्यालय थे, लेकिन अब सब बंद हो चुके हैं।

किन मामलों में जरूरी होता है गजट नोटिफिकेशन:

  • शादी के बाद नाम बदलना
  • कोर्ट आदेश के बाद नाम परिवर्तन
  • नया नाम रखना (जैसे अनिता से अनामिका)
  • धार्मिक कारणों से नाम बदलना
  • गोद लेने के बाद नाम परिवर्तन

आवेदकों की परेशानी

  • “बेटी की मार्कशीट में नाम बदलने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, फिर भोपाल जाकर कॉपी जमा की। तब भी 45 दिन लग गए।” – मनोहरलाल, सीहोर
  • “बेटे की मार्कशीट अपडेट करवानी थी। दो सप्ताह में काम नहीं हुआ तो भोपाल जाना पड़ा। दो महीने बाद गजट आया।” – अखिलेश शर्मा, मुरैना

प्रशासन का पक्ष

“गजट में देरी की वजह स्टाफ की कमी है। स्टाफ बढ़ेगा तो अधिक गजट जारी हो सकेंगे।”
जीपी कतिया, प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर, गवर्नमेंट प्रेस

साभार … 

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