अगले तीन वर्षों में उच्च सिंगल-डिजिट दर से बढ़ सकता है फार्मा सेक्टर
Growth: नई दिल्ली। भारत के घरेलू फार्मास्युटिकल बाजार में आने वाले तीन वर्षों में मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। यह अनुमान Systematix Research की हालिया रिपोर्ट में जताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का घरेलू फार्मा सेक्टर इस अवधि में उच्च सिंगल-डिजिट दर (High Single Digit Growth) से बढ़ सकता है।
GLP-1 आधारित दवाओं से मिलेगी रफ्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के ब्रांडेड फॉर्मुलेशन बाजार में ग्रोथ को खासकर GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) आधारित दवाओं के बढ़ते उपयोग और नई लॉन्चिंग से मजबूती मिलेगी।
GLP-1 दवाएं मुख्य रूप से:
- डायबिटीज प्रबंधन
- मोटापा नियंत्रण
- मेटाबॉलिक विकार
जैसी बीमारियों के इलाज में उपयोग होती हैं। इन बीमारियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण इन दवाओं की मांग भी बढ़ रही है।
इससे उन भारतीय फार्मा कंपनियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है, जिनकी घरेलू बाजार में मजबूत ब्रांड उपस्थिति और व्यापक वितरण नेटवर्क है।
अमेरिकी जेनेरिक कारोबार फिलहाल स्थिर
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार से होने वाली कमाई निकट भविष्य में अधिकांश कंपनियों के लिए स्थिर रह सकती है।
अमेरिका में:
- मूल्य प्रतिस्पर्धा (Price Erosion)
- रेगुलेटरी चुनौतियां
- सीमित नई लॉन्चिंग
जैसे कारक ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं।
क्रॉनिक थेरेपी सेगमेंट बनेगा सहारा
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय दवा कंपनियों की कुल वृद्धि को निम्न कारक समर्थन देंगे:
- घरेलू बाजार की मजबूत मांग
- नई दवाओं की लगातार लॉन्चिंग
- क्रॉनिक (दीर्घकालिक) बीमारियों के उपचार की बढ़ती हिस्सेदारी
- प्रीमियम और स्पेशलिटी प्रोडक्ट्स का विस्तार
क्रॉनिक थेरेपी सेगमेंट जैसे डायबिटीज, कार्डियक और ऑन्कोलॉजी में मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनियों की राजस्व स्थिरता बेहतर हो सकती है।
निवेशकों के लिए संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, जिन कंपनियों की घरेलू बाजार में मजबूत पकड़ है और जो नई थेरेपी श्रेणियों में तेजी से प्रवेश कर रही हैं, वे आने वाले वर्षों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। कुल मिलाकर, भले ही निर्यात बाजार से ग्रोथ सीमित दिख रही हो, लेकिन भारत का घरेलू फार्मा बाजार आने वाले समय में कंपनियों के लिए स्थिर और मजबूत वृद्धि का आधार बन सकता है।
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