वैश्विक तनाव और अस्थिर बाजार से बढ़ीं कीमतें
Increased prices: सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। चांदी 1,560 रुपये की बढ़त के साथ 2.44 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, जबकि सोना 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
वैश्विक संकेतों और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कीमती धातुओं में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। हालिया दिनों में हाजिर बाजार में दोनों धातुओं की कीमतों में करीब 7% तक की बढ़त देखी गई है। इससे निवेशकों के साथ-साथ शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने वाले लोग भी दुविधा में हैं।
एमसीएक्स और सर्राफा बाजार में अलग-अलग रुझान
राजधानी के सर्राफा बाजार में सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है, जबकि चांदी 2.6 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है।
वहीं, Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोना लगभग 1,54,700 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,41,400 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की तुलना में चांदी में अधिक उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें एक समय ऐतिहासिक उछाल के साथ 4,20,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। हालांकि इसके बाद इसमें भारी गिरावट आई और फिलहाल यह 2.41 लाख रुपये के करीब ट्रेड कर रही है।
इंडस्ट्री की मांग, ग्लोबल मार्केट में बदलाव और निवेशकों की भावना (सेंटिमेंट) को इस अस्थिरता का प्रमुख कारण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशक मौजूदा गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई है। COMEX ट्रेड में सोना शुरुआती गिरावट के बाद 4,996 डॉलर प्रति औंस से संभलकर 5,018.20 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जो 24 घंटे में करीब 0.43% की बढ़त दर्शाता है। वहीं, स्पॉट सिल्वर 0.67% की तेजी के साथ 78.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता में ठोस प्रगति न होने से सेफ-हेवन खरीदारी बढ़ी है, जिससे कीमती धातुओं को समर्थन मिला है। इसके अलावा, 19 फरवरी को प्रकाशित ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, लूनर न्यू ईयर अवकाश के दौरान एशियाई बाजारों में कम लिक्विडिटी के कारण गोल्ड मार्केट कंसोलिडेशन फेज में रहा और कीमतों की चाल पर टेक्निकल फैक्टर्स का अधिक प्रभाव देखा गया।
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