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Kedarnath Dham: 2013 की तबाही से 2025 की उम्मीद तक: अब सुरक्षित और सुलभ हो गया केदारनाथ धाम

2013 की तबाही से

Kedarnath Dham:रुद्रप्रयाग: 2013 की विनाशकारी बाढ़ के 13 साल बाद केदारनाथ धाम एक बार फिर श्रद्धा, उम्मीद और विकास का प्रतीक बन गया है। उत्तराखंड सरकार और मंदिर समिति ने मिलकर इस पवित्र स्थल को न केवल फिर से बसाया है, बल्कि पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बना दिया है।

🔱 2 मई को खुले कपाट, 15 मई तक 3.34 लाख श्रद्धालु पहुंचे

इस साल 2 मई को कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। 15 मई तक 3 लाख से अधिक तीर्थ यात्री दर्शन कर चुके हैं। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे के अनुसार, 2025 की यात्रा में 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

🚧 रीडेवलपमेंट से बदला केदारनाथ

  • गौरीकुंड से केदारनाथ तक 18 किमी पैदल मार्ग को फिर से बनाया गया है। इसमें ₹21 करोड़ की लागत आई।
  • रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक 5.35 किमी का नया और चौड़ा मार्ग तैयार किया गया है ताकि पिट्ठू, खच्चर और पैदल यात्री एक साथ चल सकें।
  • मंदाकिनी और सरस्वती नदियों के किनारे तीन लेयर की सेफ्टी वॉल बनाई गई है ताकि भविष्य में बाढ़ से मंदिर को कोई खतरा न हो।

🚠 शिलान्यास हो चुका, जल्द बनेगा सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2022 को ₹4081 करोड़ की लागत वाले रोपवे प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था।

  • यह परियोजना PPP मॉडल पर आधारित है और फिलहाल टेंडर स्टेज में है।
  • रोपवे बन जाने के बाद 18 किमी की पैदल यात्रा केवल 36 मिनट में पूरी होगी।
  • हर घंटे 1800 यात्री केदारनाथ पहुंच सकेंगे।

🏨 धाम में 7,000 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था

पुनर्निर्माण के बाद अब केदारनाथ में अधिक संख्या में यात्रियों को संभालने की तैयारी है। धाम क्षेत्र में नए गेस्टहाउस, टेंट सिटी और पब्लिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

💰 घोड़े, पालकी, होटल—190 करोड़ का कारोबार

पिछले साल केदारनाथ यात्रा से स्थानीय व्यवसायियों को करीब ₹190 करोड़ का कारोबार हुआ।

  • सिर्फ खच्चर और पालकी सेवा से ही ₹109 करोड़ की आमदनी हुई।
  • इस बार यात्रियों की संख्या बढ़ने से और ज्यादा कमाई का अनुमान है।

👪 2 लाख से ज्यादा परिवारों की आजीविका केदारनाथ यात्रा से जुड़ी

  • तीर्थ पुरोहित
  • होटल व्यवसायी
  • ट्रैवल एजेंट
  • पालकी, पिट्ठू और खच्चर सेवा देने वाले
  • स्थानीय दुकानदार

2013 की आपदा और कोरोना काल के बाद ये समुदाय अब फिर से मजबूती से खड़े हो रहे हैं।

🙏 स्थानीयों की जुबानी—अब डर नहीं, भरोसा है

40 साल से मंदिर में पूजा करा रहे राम प्रकाश पुरोहित कहते हैं, “2013 की बाढ़ ने सब कुछ खत्म कर दिया था। लगा था कि दोबारा कुछ नहीं बचेगा। लेकिन आज हर तरफ नया निर्माण है, लोगों का भरोसा है, आस्था है।”

साभार… 

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