Movement: सारनी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चुरना जंगल से निकलकर एक बार फिर बाघ का मूवमेंट सारनी क्षेत्र के आसपास देखने को मिला है। बीते सात दिनों में बाघ ने राख बांध, सलैया और कोयलांचल क्षेत्र पाथाखेड़ा के ड्रिलिंग कैंप के पास डेरा जमाए रखा है। अलग-अलग स्थानों पर बाघ के देखे जाने की सूचना से क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के बाद वन विभाग की टीम ने इलाके में सर्च अभियान चलाया, जहां कई स्थानों पर बाघ के पगमार्क मिले हैं। बताया जा रहा है कि चुरना जंगल से लेकर सारनी के राख बांध तक बाघ की लगातार चहलकदमी देखी जा रही है। यह इलाका बाघ की टेरिटरी मानी जाती है, जहां अक्सर उसका मूवमेंट रहता है।
हालांकि, पिछले करीब सात दिनों में किसी जानवर के शिकार की सूचना सामने नहीं आई है। जानकारों का कहना है कि नगर पालिका क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण शिकार की घटनाएं सामने नहीं आ रहीं। ग्रामीण इलाकों में यदि बाघ पालतू पशुओं का शिकार करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत सलैया के माता मंदिर के जंगल में बुधवार रात करीब 7:30 बजे खेत मालिक ने बाघ को देखा। इसके बाद से क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। बाघ की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उसके लोकेशन की जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।
बताया जाता है कि इसी क्षेत्र से पहले भी बाघ को दो से तीन बार ट्रेंकुलाइज कर चुरना और मंडला के बाड़ों में रखा जा चुका है। इस संबंध में उत्तर वन परिक्षेत्र अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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