आस्था, परंपरा और चमत्कारों का संगम बने देवी धाम
Navratri: भोपाल। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों और देवी धामों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। सुबह से ही मंदिरों में घंटों की गूंज और माता रानी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। नवरात्रि के अवसर पर प्रदेशभर में देवी मंदिरों की मान्यताएं और उनसे जुड़ी चमत्कारिक कथाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं।
जबलपुर का चौंसठ योगिनी मंदिर
नर्मदा तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी शिव-पार्वती विवाह प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसे देखने के लिए मां नर्मदा ने अपनी धारा तक मोड़ दी थी।
मैहर का मां शारदा धाम
52 शक्तिपीठों में शामिल मैहर मंदिर की प्रतिमा 1500 साल पुरानी मानी जाती है। यहां आल्हा-ऊदल के आरती में शामिल होने की किंवदंती भक्तों को रोमांचित करती है।
देवास टेकरी
यहां एक ही टेकरी पर चामुंडा देवी (छोटी माता) और तुलजा भवानी (बड़ी माता) विराजित हैं। मान्यता है कि यहीं देवी का रक्त गिरा था और इसी से यह स्थान शक्ति का प्रतीक बना।
सलकनपुर का मां विजयासन मंदिर
800 फीट ऊंचे विंध्याचल पर्वत पर स्थित यह मंदिर 1401 सीढ़ियों से होकर पहुंचा जाता है। नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
छिंदवाड़ा का हिंगलाज मंदिर
इसे माता सती के मस्तिष्क से स्थापित शक्तिपीठ माना जाता है। संतानों की प्राप्ति और नेत्र रोग मुक्ति के लिए यहां विशेष श्रद्धा से पूजा की जाती है।
इंदौर का बिजासन माता मंदिर
यहां एक साथ नौ देवियां विराजित हैं, जो संतानदायिनी और सौभाग्य प्रदायिनी मानी जाती हैं। मंदिर की ऐतिहासिकता इसे अद्वितीय बनाती है।
दतिया का पीतांबरा पीठ
बगलामुखी और धूमावती माता की उपासना का केंद्र यह धाम “ब्रह्मांड की स्तंभ शक्ति” के रूप में पूजनीय है।
उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर
महाकाल मंदिर के निकट स्थित यह धाम विक्रमादित्य की तपोभूमि और शक्ति पीठ दोनों रूपों में अद्वितीय है।
ग्वालियर का मांढरे वाली माता मंदिर
सिंधिया राजघराने की कुलदेवी के रूप में पूजित यह मंदिर 150 साल पुराना है और हर शुभ कार्य से पहले यहां दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
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