सीएमएचओ के रिमांडर देने के बाद भी नहीं दिखा रहे रूचि
Pathology Lab: बैतूल। छिंदवाड़ा काण्ड के बाद सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है और इसी को लेकर मेडिकल स्टोर, पैथालाजी लैब, नर्सिंग होम, निजी अस्पताल की जांच शुरू कराई गई है कि इन संस्थाओं द्वारा गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है या नहीं इसको लेकर सरकार सख्त दिखाई दे रहा है। इसी को लेकर पिछले दिनों सीएमएचओ बैतूल ने बैतूल जिले के पैथालाजी लैब संचालकों को पत्र जारी कर लैब से संबंधित जानकारी के दस्तावेजों को जमा करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक समय सीमा निकलने के बाद भी कुछ ही लैब संचालकों ने जानकारी जमा की है। अधिकांश ने जानकारी जमा नहीं की है। जिन्होंने जानकारी जमा नहीं की है वो संदेह के घेरे में भी आ रहे हैं और इसको लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। यह भी पता चला है कि जिले में 23 पैथालाजी लैब रजिस्टर्ड थे जिनमें से 4 लैब बंद होने की जानकारी मिली है।
सार्वजनिक होनी चाहिए जानकारी
जिले के वरिष्ठ पैथालाजिस्ट एवं पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अशोक बारंगा ने सांध्य दैनिक बैतूलवाणी ने पैथालाजी लैब को लेकर चर्चा की तो उन्होंने बताया कि पैथालाजी लैब बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उपचार पूर्व बीमारी के प्रमाणिकरण के लिए पैथालाजी लैब से कई तरह की जांच कराई जाती हैं। अगर योग्य व्यक्ति के द्वारा जांच की गई है तो मरीज जल्द ठीक हो सकता है और अगर अयोग्य व्यक्ति ने जांच की है तो वह मरीज के लिए घातक हो सकती है इसलिए पैथालाजी लैब पर एमडी पैथालाजिस्ट या समकक्ष डिग्री वाले डॉक्टर से ही जांच करानी चाहिए। डॉ. बारंगा ने बताया कि पैथालाजी लैब को लेकर जन जागरूकता की जरूरत है। इसके अलावा सीएमएचओ को सूची जारी करनी चाहिए कि जिले में कितने पैथालाजिस्ट हैं। इसके साथ ही उन्होंने विभाग को सुझाव दिया है कि जिस तरह रेडियोलॉजिस्ट की बैठक ली जाती है उसी तरह से पैथालाजी लैब संचालकों की बैठक होनी चाहिए और इसमें पैथालाजिस्ट भी उपस्थित होना चाहिए उनका प्रतिनिधि नहीं होना चाहिए।
लैब पर भी चस्पा होना चाहिए जानकारी
डॉ. बारंगा ने यह भी बताया कि लोगों को यह भी पता नहीं होता है कि हमने जिस लैब पर जांच कराई है वहां पर योग्य व्यक्ति के द्वारा जांच की गई है या नहीं? इसके लिए पैथालाजी लैब पर भी पैथालाजिस्ट का नाम और नंबर चस्पा होना चाहिए। इसके अलावा होने वाली जांच की फीस भी बोर्ड पर चस्पा की जानी चाहिए। कई बार जानकारी के अभाव में मरीजों से जांच फीस भी ज्यादा ले ली जाती है। उन्होंने मरीजों को भी सलाह दी है कि जिस पैथालाजी लैब पर वह जांच करा रहे हैं वहां पर पैथालाजिस्ट की जानकारी ले और मुलाकात करने की कोशिश करें जिससे होने वाली जांच की सही जानकारी उनको मिल सकती है।
Leave a comment