Rare: सागर। दीपावली से पहले मध्यप्रदेश के सागर में दुर्लभ प्रजाति का सफेद उल्लू मिला है। ‘हिमालयन वुड आउल’ नाम की इस प्रजाति को किसी ने बंधक बनाकर उसके पंखों पर गोंद और टेप चिपका दिए थे, ताकि वह उड़ न सके। आशंका है कि तांत्रिक क्रियाओं या अवैध बिक्री के लिए इसे पकड़कर रखा गया था। हालांकि, समय रहते इसे बचा लिया गया और तीन दिन की देखभाल के बाद जंगल में मुक्त कर दिया गया।
शिक्षक ने देखी दर्दनाक हालत
शास्त्री नगर के एक सरकारी स्कूल परिसर में जब एक शिक्षक ने उल्लू को जमीन पर तड़पते देखा तो तुरंत पक्षी प्रेमी और रेस्क्यूअर शैलेंद्र जैन को सूचना दी। जैन ने बताया कि दोनों पंख चिपकाए गए थे और यह साफ था कि इसे अवैध रूप से पकड़कर तांत्रिक उपयोग या बेचने की मंशा थी।
तीन दिन की देखभाल के बाद आज़ादी
शैलेंद्र जैन ने पहले पानी, साबुन और शैम्पू से पंख साफ करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। बाद में केरोसिन से गोंद हटाया गया। तीन दिन की देखभाल के बाद उल्लू पूरी तरह स्वस्थ हुआ और उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
हिमालयी उल्लू का सागर में रहस्य
जूलॉजिस्ट डॉ. मनीष जैन के अनुसार यह उल्लू सामान्यतः हिमालय से लेकर कोरिया और ताइवान तक पाया जाता है। बुंदेलखंड जैसे इलाके में इसका मिलना असामान्य है और यह किसी वन्यजीव तस्करी गिरोह की करतूत हो सकती है।
तस्करों की लाखों की डिमांड
सफेद उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है और दीपावली पर तांत्रिक क्रियाओं के लिए इसकी मांग सबसे अधिक रहती है। माना जाता है कि इसकी बलि से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। इसके पंख, चोंच और नाखून तंत्र-मंत्र में उपयोग किए जाते हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये तक होती है। यही धार्मिक मान्यता इन दुर्लभ पक्षियों के जीवन के लिए खतरा बन रही है।
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