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Technical Examination: भोपाल का 90 डिग्री टर्न ओवरब्रिज बना चर्चा का विषय, PWD इंजीनियरों पर अब होगी तकनीकी परीक्षा

भोपाल का 90 डिग्री टर्न ओवरब्रिज बना

Technical Examination:भोपाल | मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग रेलवे क्रॉसिंग पर बना 90 डिग्री टर्न वाला रेलवे ओवरब्रिज (ROB) इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। इस अनोखे डिजाइन वाले पुल पर वाहनों को 35-40 किमी प्रति घंटे से अधिक गति पर न चलाने की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों ने इसे खतरनाक मोड़ बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। इस तरह की निर्माण गड़बड़ियों और डिजाइन की लापरवाही के लगातार मामले सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बड़ा कदम उठाया है। अब इंजीनियरों को निर्माण मानकों का अध्ययन करना होगा और उनके लिए तकनीकी परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है।


90 डिग्री ब्रिज पर विवाद: सीमित जगह में मजबूरी या लापरवाही?

भोपाल के ऐशबाग में 18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह ब्रिज 648 मीटर लंबा और 8 मीटर चौड़ा है। इसमें 70 मीटर हिस्सा रेलवे के अधीन है। यह प्रोजेक्ट मई 2022 में शुरू हुआ था और 18 महीने में पूरा होना था, लेकिन अब तक अधूरा है। रेलवे ने पहले ही 90 डिग्री के तीखे मोड़ पर आपत्ति जताई थी, लेकिन PWD के इंजीनियरों ने स्थान की कमी का हवाला देते हुए डिज़ाइन पर अड़े रहे। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार इस ब्रिज पर तेज गति से वाहन चलाना दुर्घटना का कारण बन सकता है।


इंदौर में Z-शेप ब्रिज, राज्यभर में निर्माण पर उठे सवाल

भोपाल के बाद इंदौर में भी Z आकार का ओवरब्रिज निर्माणाधीन है। इसके साथ ही प्रदेश के कई हिस्सों से भवन, सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इसी को लेकर अब PWD में जवाबदेही तय करने की पहल की जा रही है।


PWD इंजीनियरों की होगी परीक्षा, तभी मिलेगी फील्ड पोस्टिंग

PWD प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि:

  • सहायक, उपयंत्री और कार्यपालन यंत्री को निर्माण से जुड़े भारतीय मानकों, इंडियन रोड कांग्रेस, नेशनल बिल्डिंग कोड आदि का पुनः अध्ययन करना होगा।
  • 15 अगस्त के बाद परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदर्शन के आधार पर फील्ड पोस्टिंग और जिम्मेदारियां तय होंगी।
  • चीफ और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर्स को केवल स्टडी मटेरियल का अध्ययन करना होगा।

परीक्षा का डेटा रहेगा रिकॉर्ड में, वार्षिक मूल्यांकन में होगा उपयोग

परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में कराई जाएगी। प्राप्त अंकों के आधार पर इंजीनियरों की प्रैक्टिकल एफिशिएंसी, ट्रेनिंग की जरूरत, पदस्थापन और विशेष परियोजनाओं में चयन किया जाएगा। विभाग इस डेटा को सुरक्षित रखेगा।


भविष्य में टिकाऊ निर्माण की तैयारी

PWD का यह निर्णय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने, सुरक्षा मानकों के पालन और टिकाऊ निर्माण (Durability) सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस प्रक्रिया से सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के निर्माण कार्य भरोसेमंद, तकनीकी रूप से मजबूत और दुर्घटना-मुक्त हों।

साभार… 

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