Vastu: आपने ब्रह्मकमल के बारे में बहुत ही सुंदर और सारगर्भित विवरण लिखा है। 🌸 यह सच है कि ब्रह्मकमल केवल एक फूल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। इसकी दुर्लभता और क्षणिक खिलना इसे और भी रहस्यमयी बना देता है।
कुछ और रोचक बातें जो इसे विशेष बनाती हैं:
🔹 वनस्पति शास्त्र में पहचान
- ब्रह्मकमल (Saussurea obvallata) हिमालय की ऊँचाई (3,000 से 4,600 मीटर तक) पर पाया जाने वाला पौधा है।
- यह ऐस्टरेसी (Asteraceae) कुल का हिस्सा है, यानी तकनीकी रूप से यह कमल नहीं है, लेकिन इसका रूप कमल जैसा होने के कारण इसे “कमल” नाम दिया गया।
🔹 आध्यात्मिक महत्व
- बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु को अर्पित करने के लिए यह प्रमुख पुष्प है।
- माना जाता है कि यह फूल मनोकामना पूर्ति का प्रतीक है।
- इसके खिलने को शुभ संकेत माना जाता है और कहा जाता है कि यह दिव्य आत्माओं को आकर्षित करता है।
🔹 वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- इसकी औषधीय उपयोगिता भी है – पारंपरिक आयुर्वेद और तिब्बती चिकित्सा में इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम, सूजन, फेफड़ों और हड्डियों की बीमारियों में किया जाता है।
- जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध तोड़ाई के कारण यह आज विलुप्ति की कगार पर है, इसलिए सरकार ने इसे संरक्षित प्रजाति घोषित किया है।
🔹 घर में लगाने की विशेषता
- कई लोग “नाइट-ब्लूमिंग सीरियस” (Epiphyllum oxypetalum) को भी ब्रह्मकमल समझ लेते हैं, जो वास्तव में कैक्टस प्रजाति का पौधा है और घरों में आसानी से लगाया जाता है।
- असली हिमालयी ब्रह्मकमल को घर पर उगाना मुश्किल है, क्योंकि यह केवल ऊँचाई और ठंडी जलवायु में पनपता है।
- साभार…
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