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Vastu Shastra: वास्तु शास्त्र से बदल सकती है घर की किस्मत

वास्तु शास्त्र से बदल सकती है

जानें कौन सी दिशाएं लाती हैं सुख-समृद्धि और कौन सी परेशानियां

Vastu Shastra: हर व्यक्ति अपने घर में शांति, समृद्धि और सौहार्द चाहता है। लेकिन कई बार तमाम कोशिशों के बावजूद आर्थिक तंगी, कलह या मानसिक तनाव पीछा नहीं छोड़ते। ऐसे में वास्तुशास्त्र हमारे लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर की बनावट, चीजों की दिशा और सफाई व्यवस्था हमारे जीवन पर गहरा असर डालती है। यदि वास्तु के नियमों का पालन किया जाए तो परेशानियों से बचा जा सकता है और जीवन में स्थिरता आ सकती है।


🧭 उत्तर-पूर्व दिशा: देवताओं की दिशा, रखिए हमेशा स्वच्छ

वास्तु के अनुसार, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को देवताओं की दिशा कहा जाता है।
यह दिशा धन, सुख और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का द्वार मानी जाती है।

📌 क्या करें?

  • इस दिशा को हमेशा स्वच्छ और खाली रखें।
  • यहां भारी वस्तुएं या कबाड़ बिल्कुल न रखें।
  • यह स्थान ध्यान, पूजा या जल स्त्रोत (जैसे तुलसी या पानी का कलश) के लिए उपयुक्त होता है।

💡 उत्तर-पश्चिम दिशा: आर्थिक स्रोतों की दिशा

उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है।
यह दिशा आर्थिक प्रवाह और अवसरों से जुड़ी होती है

📌 क्या करें?

  • इस दिशा में हमेशा प्राकृतिक या कृत्रिम रोशनी बनाए रखें।
  • यहां की नियमित सफाई करें।
  • गंदगी या अंधेरा इस दिशा में वित्तीय रुकावट ला सकता है।

🚫 दक्षिण दिशा: यम का द्वार, रखें हमेशा बंद

दक्षिण दिशा को वास्तु में यम द्वार यानी मृत्यु या नकारात्मक ऊर्जा की दिशा माना गया है।

📌 क्या न करें?

  • इस दिशा में मुख्य द्वार या प्रवेश द्वार नहीं होना चाहिए।
  • यहां धन या कीमती सामान न रखें।
  • घर का रसोईघर या मुखिया का कमरा इस दिशा में न बनाएं।

विशेष रूप से, दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई और दक्षिण दिशा में शयन कक्ष होने पर जीवन में संघर्ष और बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।


🚫 उत्तर-पूर्व में रसोई? टालिए यह गलती

उत्तर-पूर्व दिशा जहां ईश्वर की ऊर्जा का स्रोत है, वहीं यदि रसोई इस दिशा में हो तो यह धार्मिक और मानसिक संतुलन बिगाड़ सकती है।

📌 सुझाव:
रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) सबसे उपयुक्त माना गया है, क्योंकि यह अग्नि तत्व से जुड़ी दिशा है।


वास्तु पालन से पाएं जीवन में स्थिरता और समृद्धि

वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं, बल्कि प्राकृतिक ऊर्जा के साथ तालमेल बिठाने का विज्ञान है।
यदि हम घर के निर्माण, साज-सज्जा और दैनिक व्यवस्था में वास्तु के सरल नियम अपनाएं, तो जीवन की कई उलझनें अपने आप सुलझ सकती हैं।

साभार… 

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