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Nominated: राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 सदस्यों को किया नामांकित, उज्ज्वल निकम, हर्षवर्धन श्रृंगला शामिल

राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 सदस्यों

Nominated: नई दिल्ली | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत राज्यसभा के लिए 4 नए नामांकित सदस्यों की घोषणा की है। ये नामांकन संसद में विशेषज्ञता और अनुभव की विविधता बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

🟢 नामांकित सदस्य:

  1. उज्ज्वल निकम – देश के चर्चित अभियोजकों में शामिल, जिन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले, गुलशन कुमार हत्या और 1993 मुंबई ब्लास्ट जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। हाल ही में वे लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर भी उम्मीदवार रहे थे।
  2. सी. सदानंदन मास्टरकेरल के प्रख्यात समाजसेवी और शिक्षाविद। दशकों से सामाजिक न्याय, शिक्षा और पिछड़े वर्गों के कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत।
  3. हर्षवर्धन श्रृंगलाभारत के पूर्व विदेश सचिव, जो विदेश नीति, कूटनीति और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे बांग्लादेश और अमेरिका में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं।
  4. डॉ. मीनाक्षी जैन – प्रसिद्ध इतिहासकार और शिक्षाविद, जो भारतीय संस्कृति, सभ्यता और इतिहास के विषय में अपने वैकल्पिक दृष्टिकोणों के लिए जानी जाती हैं।

📘 संविधान में नामांकित सदस्यों का प्रावधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(3) के अनुसार, राष्ट्रपति राज्यसभा में अधिकतम 12 सदस्यों को नामांकित कर सकते हैं, जो:

  • कला,
  • साहित्य,
  • विज्ञान,
  • सामाजिक सेवा
    जैसे क्षेत्रों में विशेष योग्यता और योगदान रखते हों।

वर्तमान में राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, जिनमें:

  • 233 सदस्य राज्य विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं (अप्रत्यक्ष चुनाव)
  • और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामांकित किए जाते हैं।

🗳 राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है?

राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य प्रत्यक्ष जनता के वोट से नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक चुनते हैं।
इस प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष चुनाव कहते हैं और यह अनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय वोट प्रणाली के तहत होती है।


🎯 नामांकित सदस्यों की भूमिका क्यों अहम?

नामांकित सदस्य अक्सर उन क्षेत्रों से आते हैं, जो सामान्य चुनावी राजनीति से परे हैं — जैसे विज्ञान, इतिहास, कला, विदेश नीति, आदि।
इनका मकसद है कि संसद में विशेषज्ञ ज्ञान और अनुभव का समावेश हो ताकि नीति निर्माण और कानून प्रक्रिया में संतुलन बना रहे।

साभार… 

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