Rules:सनातन धर्म में मां गंगा को देवियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि उनका पावन जल मोक्ष प्रदान करने वाला और हर धार्मिक अनुष्ठान का अनिवार्य हिस्सा है। पूजा-पाठ, अभिषेक, शुद्धिकरण और यज्ञ जैसे कर्मकांड गंगाजल के बिना अधूरे माने जाते हैं। घरों में भी लोग बड़े श्रद्धा से गंगाजल रखते हैं, लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसके नियमों का पालन न करने से यह अपवित्र हो सकता है और इसका शुभ प्रभाव कम हो जाता है। उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि गंगाजल घर में रखने के चार महत्वपूर्ण नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
1. अंधेरा या गंदा स्थान न चुनें
गंगाजल अत्यंत पवित्र तत्व है, इसलिए इसे कभी भी अंधेरे, नम या गंदे स्थान पर नहीं रखना चाहिए। प्रकाश और स्वच्छता इसके सकारात्मक और दिव्य प्रभाव को बनाए रखते हैं।
2. तामसिक भोजन व पदार्थों के बाद न छुएं
आचार्य के अनुसार जिस दिन मांस, मदिरा या किसी भी तामसिक पदार्थ का सेवन किया जाए, उस दिन गंगाजल को स्पर्श करने से बचना चाहिए। जिस कमरे में ऐसे पदार्थों का सेवन होता है, वहां गंगाजल रखना भी गृहदोष उत्पन्न कर सकता है।
3. ईशान कोण सर्वोत्तम दिशा
गंगाजल रखने के लिए घर के मंदिर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, सबसे शुभ मानी गई है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। प्रतिदिन श्रद्धा से गंगाजल के पात्र की पूजा करना भी शुभ फल देता है।
4. प्लास्टिक के पात्र से परहेज
शास्त्रों में प्लास्टिक को अशुद्ध माना गया है, इसलिए गंगाजल को प्लास्टिक की बोतल में रखना भूल है। इसके लिए तांबे, पीतल, चांदी या मिट्टी के पात्र सर्वोत्तम माने गए हैं। ये धातुएं शुद्धता और धार्मिक दृष्टि से भी उत्तम मानी जाती हैं।
आचार्य भारद्वाज का कहना है कि गंगाजल की पवित्रता बनाए रखने से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। वहीं नियमों की अनदेखी करने से गंगाजल का प्रभाव कम हो सकता है।
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