अब बच्चे सीखेंगे जीवन से जुड़े कौशल
Big change: डिजिटल डेस्क। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए कक्षा 6वीं से 8वीं तक स्किल एजुकेशन को अनिवार्य विषय के रूप में लागू कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि अब छात्रों को केवल किताबों और रटकर पढ़ाई तक सीमित न रखते हुए वास्तविक जीवन से जुड़े कौशलों से परिचित कराना जरूरी हो गया है।
यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लिया गया है। इसके अनुसार, इस सत्र से NCERT द्वारा तैयार स्किल बोध सीरीज़ की किताबें सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू होंगी। ये किताबें प्रिंट और डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जिससे स्कूलों और छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।
तीन प्रमुख श्रेणियों के प्रोजेक्ट शामिल
नई स्किल बोध श्रृंखला में छात्रों को तीन प्रकार के प्रोजेक्ट पूरे करने होंगे—
- जीवों से जुड़ा कार्य – पौधों, जानवरों की देखभाल
- मशीनों और मटेरियल से जुड़े कौशल – जैसे बेसिक मैकेनिकल स्किल्स
- ह्यूमन सर्विसेज – सामुदायिक सेवा व सहायता कार्य
तीन वर्षों में छात्रों को कुल 9 प्रोजेक्ट पूरे करने होंगे, जिनके लिए लगभग 270 घंटे की प्रैक्टिकल लर्निंग तय की गई है।
स्कूलों को बदलना होगा टाइमटेबल
CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे टाइमटेबल में आवश्यक बदलाव करें—
- हर साल 110 घंटे (लगभग 160 पीरियड) स्किल एजुकेशन के लिए जरूरी
- प्रति सप्ताह लगातार दो पीरियड अनिवार्य
- छह प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स में से स्कूल अपनी परिस्थितियों के अनुसार तीन प्रोजेक्ट चुन सकेंगे
शिक्षकों को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
स्किल-बेस्ड लर्निंग को प्रभावी बनाने के लिए CBSE, NCERT और PSSIVE मिलकर शिक्षकों की ट्रेनिंग आयोजित करेंगे। प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग में शिक्षकों की गाइडिंग भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
मूल्यांकन पद्धति में भी बड़ा बदलाव
स्किल एजुकेशन की परीक्षा पारंपरिक तरीकों से अलग होगी:
- 10% लिखित परीक्षा
- 30% वाइवा/प्रेजेंटेशन
- 30% एक्टिविटी बुक
- 10% पोर्टफोलियो
- 20% शिक्षक का अवलोकन
CBSE के इस कदम का उद्देश्य बच्चों को क्या पढ़ते हैं से आगे बढ़ाकर यह सिखाना है कि वे क्या करते हैं और कैसे सीखते हैं। शिक्षा में यह बदलाव बच्चों को भविष्य के लिए अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और कौशलयुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
साभार …..
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