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Arrested: सायबर ठगी के मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार

सायबर ठगी के मामले में पुलिस ने 3

फर्जी खातों से 10 करोड़ से अधिक का किया गया है ट्रांजैक्शन

Arrested: बैतूल। सायबर ठगी के मामले में पुलिस आए दिन नए-नए खुलासे कर रही है। पुलिस ने इस मामले में पूर्व में आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं तीन आरोपियों की हाल ही में पुलिस ने इस मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसका खुलासा पुलिस ने पत्रकारवार्ता में किया। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने बताया कि सायबर ठगी के मामले में फर्जी फर्म के जरिए खाते उपलब्ध कराने वाला, सिम बेचने वाला व अकाउंट खरीदने वाले कुल 9 आरोपी पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं।


करोड़ों की मनी-ट्रेल जांच जारी


बैतूल जिले में सामने आए अब तक के सबसे बड़े संगठित साइबर ठगी एवं अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के प्रकरण में बैतूल पुलिस ने निरंतर प्रभावी कार्रवाई करते हुए फर्जी फर्म, म्यूल खातों, अवैध सिम बिक्री एवं अकाउंट खरीद-फरोख्त की पूरी श्रृंखला का खुलासा किया है। 14 दिसंबर 2025 को की गई नवीन कार्रवाई में 03 अतिरिक्त आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस प्रकरण में अब तक 9.84 करोड़ से अधिक के अवैध ऑनलाइन लेन-देन का खुलासा हो चुका है, जबकि एक म्यूल खाते में सात माह के भीतर 10 करोड़ से अधिक का ट्रांजैक्शन पाया गया है। यह संपूर्ण कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र जैन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी के निर्देशन में गठित साइबर सेल एवं विशेष एसआईटी टीम द्वारा की गई सुनियोजित विवेचना का परिणाम है।


6 लोगों की पूर्व में हो चुकी गिरफ्तारी


इस प्रकरण में 20 नवंबर 2025 को राजा उर्फ आयुष चौहान, अंकित राजपूत,नरेंद्र सिंह राजपूत एवं 7 दिसम्बर को अमित अग्रवाल को (इंदौर से गिरफ्तार) किया। वहीं 11 दिसंबर 2025 इंदौर से राजेन्द्र राजपूत (पूर्व में फरार), ब्रजेश महाजन को गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकरण में पुलिस ने 14 दिसम्बर को तीन नए आरोपी अश्विन धर्मवाल को खंडवा से, प्रवीण जयसवाल को खंडवा से एवं पीयूष राठौड़ बैतूल से गिरफ्तार किया है।


फर्जी फर्म के जरिए म्यूल खातों को की फंडिंग


जांच में यह तथ्य सामने आया कि बैतूल जिले के 7 म्यूल खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन फर्जी फर्मों के माध्यम से किया गया। अश्विन धर्मवाल द्वारा जानबूझकर अश्विन एग्रो (खिरकिया, जिला हरदा) नामक फर्जी फर्म पंजीकृत कराई गई तथा उसका चालू खाता अवैध ऑनलाइन बेटिंग एवं साइबर ठगी के लेन-देन के लिए अन्य आरोपियों को सौंप दिया गया। पैसों के लालच में अपराध की जानकारी होते हुए भी खाते का दुरुपयोग होने दिया गया, जिससे लगभग ?2 करोड़ 70 लाख की राशि म्यूल खातों में प्रवाहित हुई। फर्म अश्विन एग्रो के खाते से बैतूल सहित अन्य खातों में कुल ?10 करोड़ 12 लाख की अवैध राशि का ट्रांजैक्शन पाया गया। अवैध ऑनलाइन बेटिंग एवं गेमिंग से प्राप्त राशि पहले फर्जी फर्मों के चालू खातों में भेजी जाती थी, तत्पश्चात वहां से म्यूल खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर की जाती थी।


अकाउंट खुलवाने व उपलब्ध कराने वाला मुख्य कड़ी


प्रवीण जयसवाल इस पूरे नेटवर्क में बैंक खाते खुलवाने एवं उन्हें आगे उपलब्ध कराने वाला प्रमुख सदस्य रहा है। जांच में सामने आया कि अश्विन एग्रो फर्म खुलवाने में इसकी निर्णायक भूमिका रही। उसने आर्थिक प्रलोभन देकर फर्जी दुकान स्थापित कराई, जिसमें दिखावे के लिए खाली बोतलों में पानी भरकर खाद्य एवं केमिकल उत्पादों के लेबल लगाए गए, ताकि फर्म वास्तविक प्रतीत हो। प्रवीण द्वारा अब तक खरगोन, खंडवा, हरदा, इंदौर एवं जालगांव (महाराष्ट्र) में लगभग 50 व्यक्तियों के बैंक खाते खुलवाए गए, जिनमें से करीब 20 चालू खाते हैं। चालू खातों की किट अन्य सहयोगी आरोपियों को अवैध लेन-देन हेतु सौंप दी जाती थी।


अवैध सिम कार्ड सप्लायर


पीयूष राठौड़ द्वारा अवैध रूप से सिम कार्ड उपलब्ध कराए जाने का खुलासा हुआ है। वह ग्राहकों को भ्रमित कर दो बार बायोमेट्रिक प्रक्रिया कराता था – एक सिम ग्राहक को देकर दूसरी सिम अपने पास रख लेता था, जिसे बाद में अपराधियों को बेच दिया जाता था। जांच में यह भी पाया गया कि पीयूष द्वारा राजा को 02 सिम ?5,000 में बेचे गए। बिना दस्तावेज सिम उपलब्ध कराने की यह श्रृंखला संगठित साइबर अपराध को मजबूती प्रदान कर रही थी। जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि आरोपीगण द्वारा कमीशन के लालच में जानबूझकर बैंक खाते उपलब्ध कराने की संगठित व्यवस्था अपनाई गई। खाताधारकों ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से अपने बैंक खाते, डेबिट कार्ड, चेकबुक एवं ओटीपी अन्य व्यक्तियों को सौंपे।


नेटवर्क में खातों के लिए पूर्व-निर्धारित कमीशन दरें तय थीं-


आरोपियों का बकायदा कमिश्रर भी तय था। सेविंग अकाउंट उपलब्ध कराने पर 10,000 प्रति खाता, चालू (करंट) अकाउंट उपलब्ध कराने पर 26,500 प्रति खाता दिया जाता था। जांच में यह भी पाया गया कि किसी फर्म/कंपनी का करंट अकाउंट खुलवाने हेतु फर्जी दुकानों/प्रतिष्ठानों का दिखावा किया जाता था। इन दुकानों में नकली सामग्री, खाली बोतलें, डमी स्टॉक एवं फर्जी साइन बोर्ड रखे जाते थे, ताकि बैंक निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान वास्तविक प्रतीत हो और बैंक अधिकारियों द्वारा चालू खाता खोल दिया जाए। खाता खुलने के बाद उसकी किट एवं नियंत्रण अन्य सहयोगी आरोपियों को सौंप दिया जाता था, जिनका उपयोग अवैध ऑनलाइन बेटिंग एवं साइबर ठगी की राशि के बड़े पैमाने पर लेन-देन हेतु किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि करंट अकाउंट में डेबिट फ्रीज़ की सुविधा नहीं होने एवं उच्च ट्रांजैक्शन सीमा उपलब्ध होने के कारण अपराधियों द्वारा करोड़ों रुपये के निरंतर ट्रांजैक्शन इन्हीं खातों के माध्यम से किए जाते थे। पुलिस द्वारा ऐसे सभी खातों एवं खाताधारकों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है तथा यह स्पष्ट किया जाता है कि कमीशन के लालच में खाता उपलब्ध कराना स्वयं एक दंडनीय अपराध है, जिसमें संबंधित खाताधारक को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


यह सामग्री की जब्त


प्रकरण में गिरफ्तार सभी आरोपियों से एक-एक मोबाइल फोन जप्त किया गया है, जिनमें अवैध लेन-देन, संपर्क सूत्र एवं डिजिटल साक्ष्य पाए गए हैं। जप्त सामग्री को फॉरेंसिक जांच हेतु भेजा जा रहा है।


ऑपरेशन में शामिल टीम


डीएसपी दुर्गेश आर्मो, निरीक्षक नीरज पाल, एसआई में अश्विनी चौधरी (साइबर), नवीन सोनकर (साइबर), उत्तम मस्तकार, राकेश सारेयाम, रवि शाक्य, एएसआई में तरुण पटेल, शिव उइके, आरक्षकों में दीपेन्द्र सिंह (साइबर), राजेंद्र धाड़से (साइबर), बलराम राजपूत (साइबर), पंकज (साइबर) एवं आरक्षक सचिन हनवते (साइबर) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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