Electricity is expensive: भोपाल। मध्यप्रदेश में उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की तैयारी की जा रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी टैरिफ पिटीशन मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) में दाखिल कर दी है। पिटीशन में बिजली कंपनियों ने अपने बढ़ते घाटे का हवाला देते हुए दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता जताई है। कंपनियों का तर्क है कि बिना टैरिफ वृद्धि के वित्तीय संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
हजारों करोड़ के घाटे में बिजली वितरण कंपनियां
सूत्रों के अनुसार राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां भारी आर्थिक संकट से जूझ रही हैं।
- मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी करीब 18,712 करोड़ रुपये के घाटे में है।
- पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर लगभग 16,378 करोड़ रुपये का घाटा है।
- पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी करीब 7,285 करोड़ रुपये के नुकसान में चल रही है।
इन्हीं बढ़ते घाटों को पाटने के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया गया है।
प्रस्ताव और स्वीकृति में हमेशा रहा अंतर
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि और नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत वृद्धि में हमेशा बड़ा अंतर रहा है।
- 2021-22 : 6.23% प्रस्तावित, 0.63% स्वीकृत
- 2022-23 : 8.71% प्रस्तावित, 2.64% स्वीकृत
- 2023-24 : 3.20% प्रस्तावित, 1.65% स्वीकृत
- 2024-25 : 3.86% प्रस्तावित, मात्र 0.07% स्वीकृत
- 2025-26 : 7.52% प्रस्तावित, 3.46% स्वीकृत
इन आंकड़ों से साफ है कि नियामक आयोग आमतौर पर उपभोक्ताओं को राहत देते हुए प्रस्तावित वृद्धि से कम दरों को मंजूरी देता रहा है।
आयोग के फैसले पर टिकी नजरें
अब यह देखना अहम होगा कि 2026-27 के लिए नियामक आयोग बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है। अगर 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है, तो इसका सीधा असर घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
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