Hearing: भोपाल। मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े मामले में आज (बुधवार) सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे यह तय हो सकता है कि वर्षों से अटकी भर्ती प्रक्रियाओं को आखिर कब गति मिलेगी।
⚖️ पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
पिछली सुनवाई में ओबीसी वर्ग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी ने आरोप लगाया था कि
“जब मामला बुलाया गया तब राज्य सरकार की ओर से कोई भी वकील अदालत में मौजूद नहीं था।”
हालांकि मध्यप्रदेश सरकार ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसके वरिष्ठ विधि अधिकारी कोर्ट में उपस्थित थे और सरकार पूरी तरह से ओबीसी को 27% आरक्षण देने के पक्ष में है।
🏛 सरकार की स्थिति क्या है?
राज्य सरकार पहले ही
- हाईकोर्ट में लंबित सभी याचिकाएं
- सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करवा चुकी है
सरकार का आधिकारिक पक्ष है कि वह
“ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
🚨 ओबीसी वर्ग के वकीलों का बड़ा आरोप
ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं का कहना है कि—
🔹 सरकार ने जानबूझकर मामला सुप्रीम कोर्ट भेजा ताकि
27% आरक्षण लागू करने का दबाव कम किया जा सके।
🔹 भर्ती विज्ञापनों में 27% आरक्षण दिखाया जाता है
लेकिन
13% पद ‘होल्ड’ पर रख दिए जाते हैं, जिससे वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा।
🔹 जबकि सच्चाई यह है कि
“27% आरक्षण कानून पर न हाईकोर्ट ने रोक लगाई है, न सुप्रीम कोर्ट ने।”
इसके बावजूद पिछले एक साल से सिर्फ तारीखें दी जा रही हैं, जिससे हजारों युवाओं की भर्तियाँ अटकी हुई हैं।
🎯 आज की सुनवाई क्यों बेहद अहम है?
आज की सुनवाई में —
- राज्य सरकार
- ओबीसी वर्ग
दोनों अपने-अपने तर्क अदालत में रखेंगे।
यदि कोर्ट कोई स्पष्ट निर्देश देता है, तो यह मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।
👉 इसका सीधा असर पड़ेगा
MP की सरकारी भर्तियों, चयन सूचियों और नियुक्तियों पर।
साभार…
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