जाति आधारित भेदभाव खत्म करने और चुनावों में जातिगत विश्लेषण रोकने का आह्वान
Meeting: चंडीगढ़। Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई Akhil Bharatiya Pratinidhi Sabha की तीन दिवसीय बैठक रविवार को संपन्न हो गई। बैठक में समाज में व्याप्त जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने और चुनावों के दौरान मतदाताओं के जाति के आधार पर जनसांख्यिकीय विश्लेषण की प्रवृत्ति को रोकने का आह्वान किया गया।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आरएसएस के महासचिव Dattatreya Hosabale ने कहा कि संघ सामाजिक सद्भाव का समर्थक है और समाज को जाति के आधार पर बांटने की कोशिशों का विरोध करता है।
वैश्विक हालात के बीच भारत की कूटनीति की सराहना
Dattatreya Hosabale ने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और विकास के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और संघ भी वैश्विक शांति व सहयोग का समर्थक है।
संघ की स्थापना किसी के विरोध के लिए नहीं
उन्होंने कहा कि आरएसएस के संस्थापक Keshav Baliram Hedgewar ने संगठन की स्थापना किसी विशेष समुदाय, धर्म या पूजा-पद्धति का विरोध करने के उद्देश्य से नहीं की थी। होसबले ने कहा कि पूजा-पद्धतियों और रीति-रिवाजों में अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन इससे समाज की मूल एकता पर कोई असर नहीं पड़ता।
समाज के लिए काम करने वाले सभी लोग स्वयंसेवक
संघ की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन में समाज की भलाई के लिए काम करने वाले सभी लोगों का स्वागत है। उनके अनुसार जो भी व्यक्ति समाजहित में रचनात्मक कार्य करता है, संघ उसे स्वयंसेवक के रूप में देखता है।
पिछले एक वर्ष में बढ़ा संघ का विस्तार
बैठक में संगठन की गतिविधियों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। Dattatreya Hosabale ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान संघ के कार्यों और गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और देशभर में संगठन का विस्तार लगातार बढ़ रहा है।
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