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Conservation Reserve: खण्डेलवाल के प्रस्ताव पर बना प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व

खण्डेलवाल के प्रस्ताव पर बना प्रदेश

ताप्ती के नाम पर बैतूल जिले की तीन तहसीलों को जोड़कर बनाया है कंजर्वेशन

Conservation Reserve: भोपाल। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल के प्रस्ताव पर देश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व बनाया गया है। इसकी खासियत यह है कि बैतूल जिले की तीन तहसीलों को जोडक़र बनाया गया है और इसका नाम ताप्ती पर रखा गया है। श्री खण्डेलवाल द्वारा 13 मार्च को बोर्ड की 28 वीं बैठक में दिए गए प्रस्ताव पर 21 मई को मंजूरी मिली थी जो कि जिले के बड़ी उपलब्धि है।


सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन


जानकारी के अनुसार प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व अब बैतूल जिले में बन गया है। इसका नाम ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व रखा गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता वाले स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने तीन महीने पहले इसका फैसला किया था। अब राज्य सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह रिजर्व बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही तहसीलों के जंगलों में फैला है। कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 224.844 वर्ग किमी रिजर्व फॉरेस्ट और 25.156 वर्ग किमी प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट शामिल हैं। यह रिजर्व सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (मप्र) व मेलघाट टाइगर रिजर्व (महाराष्ट्र) को जोडऩे वाले वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा करेगा। ताप्ती, चिचोली और तावड़ी फॉरेस्ट रेंज मिलाकर इसे गठित किया गया है। यह देश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व है जो दो टाइगर रिजर्व को जोड़ता है।


हेमंत खण्डेलवाल के प्रस्ताव पर हुआ अमल


सुझाव प्रदेश भाजपाध्यक्ष व स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड सदस्य हेमंत खंडेलवाल ने 13 मार्च को बोर्ड की 28वीं बैठक में दिया था। प्रस्ताव को 21 मई की बैठक में मंजूरी मिली थी। प्रदेश में जल्द दो नए कंजर्वेशन रिजर्व बनेंगे। पहला बालाघाट का सोनेवानी, जो 163.20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व को जोडऩे वाला कॉरिडोर होगा। दूसरा गुना का राघौगढ़, जो 115 हेक्टेयर क्षेत्रफल का होगा।


यहां भी हैं कंजर्वेशन रिजर्व


तमिलनाडु का तिरुविदैमरुदुर भारत का पहला कंजर्वेशन रिजर्व है, जो 2005 को घोषित किया गया था। यह तिरुविदैमरुदुर गांव के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में 7 एकड़ जमीन पर मौजूद है। भारत में वर्तमान में कुल 115 कंजर्वेशन रिजर्व हैं, इनमें सर्वाधिक 33 जम्मू-कश्मीर में, 21 राजस्थान में, 17 कर्नाटक और 15 महाराष्ट्र में हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 5548.75 वर्ग किमी है।


इससे क्या होगा फायदा?


यहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत सेंचुरी जैसी सुरक्षा मिलेगी। स्थानीय लोगों के वनोपज संग्रह के अधिकार यथावत रहेंगे। आदिवासी पहले की तरह महुआ, तेंदूपत्ता, चिरौंजी, गोंद, सूखी लकड़ी जुटा सकेंगे। होम स्टे और वाइल्ड लाइफ सफारी की अनुमति मिलेगी। ताप्ती टाइगर व लेपर्ड के मूवमेंट का सबसे अहम कॉरिडोर है। यहां ब्लैक बक, चीतल और जंगली उल्लू देखे जा सकते हैं।


यह है अंतर


यहां वन्यजीव व प्रकृति की पूर्ण सुरक्षा होती है। लकड़ी काटना व अन्य मानवीय गतिविधियां प्रतिबंधित रहती हैं। संरक्षण तो होता है, पर कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे चराई या स्थानीय उपयोग नियंत्रित तरीके से चल सकते हैं। यह बफर जोन जैसा होता है, जहां स्थानीय समुदाय की सहभागिता से संरक्षण और आजीविका दोनों को महत्व दिया जाता है।

साभार… 

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