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Fitness: कंडम हालत में दौड़ रही स्कूल वैन

कंडम हालत में दौड़

फिटनेस है और ना ही किया जाता है इंश्योरेंस

Fitness: भैंसदेही। गुदगांव रोड पर 21 जनवरी को हुए भीषण सडक़ हादसे को लेकर अब चौंकाने वाला और बेहद गंभीर खुलासा हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में जहां टाटा मैजिक स्कूल वैन में सवार 15 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, वहीं मासूम बच्ची हर्षिता की मौके पर ही मौत हो गई थी। अब इस हादसे ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही की परते खोल दी हैं। जांच में सामने आया है कि जिस टाटा मैजिक वैन से रोज़ाना बच्चों को स्कूल लाया-ले जाया जा रहा था, उसका फिटनेस प्रमाण पत्र वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुका था। इतना ही नहीं, वाहन का इंश्योरेंस भी नहीं था। यानी यह वैन पूरी तरह अवैध और असुरक्षित हालत में बच्चों की जान से खिलवाड़ करते हुए सडक़ों पर दौड़ रही थी।


आंखें मूंदे रहा स्कूल प्रबंधन


सबसे गंभीर बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही स्कूल प्रबंधन की जानकारी में थी। इसके बावजूद बिना फिटनेस और इंश्योरेंस के वाहन को बच्चों के परिवहन की अनुमति दी गई। नतीजा यह हुआ कि एक मासूम बच्ची की जान चली गई और कई परिवार जिंदगी भर का दर्द झेलने को मजबूर हो गए। यदि वाहन का इंश्योरेंस और वैध फिटनेस होता, तो कम से कम मृतक बच्ची हर्षिता के परिजनों को बीमा क्लेम मिल सकता था, लेकिन लापरवाही ने वह सहारा भी छीन लिया।


स्कूल प्रबंधक के बयान पर सवाल


हादसे के बाद अब वैदिका विद्या पीठ स्कूल का प्रबंधन खुद को बचाने की कोशिश में अलग-अलग बयान दे रहा है। स्कूल प्रबंधक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बताया कि टाटा मैजिक वैन बच्चों के पालकों द्वारा हायर की गई थी। लेकिन जब इस संबंध में मृतक बच्ची हर्षिता के पिता से बात की गई, तो उन्होंने साफ-साफ कहा कि यह गाड़ी स्कूल प्रबंधन की ही थी। हम हर महीने स्कूल को किराया देते थे। यह बयान स्कूल प्रबंधक के दावे को पूरी तरह झूठा और भ्रामक साबित करता है। सवाल यह उठता है कि क्या स्कूल प्रबंधन जानबूझकर जिम्मेदारी से बचने के लिए तथ्य बदल रहा है?
इनका कहना…
जांच में भी विरोधाभास भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग द्वारा की गई। प्रारंभिक जांच में यह कहा गया है कि स्कूल द्वारा वाहन हायर नहीं किया गया था। वो बच्चों के पलकों के द्वारा हायर की गई थी। लेकिन ज़मीनी सच्चाई, परिजनों के बयान और रोज़ाना स्कूल संचालन के तरीके इस जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
सुखदेव धोटे, बी.आर.सी, भैंसदेही

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