Happiness: इंदौर। सात साल बाद मां बनने की खुशी और जानलेवा बीमारी के बीच इंदौर की 35 वर्षीय जागृति कुशवाह ने असाधारण हिम्मत दिखाते हुए जिंदगी की सबसे बड़ी जंग जीत ली। गर्भावस्था के दौरान दोनों किडनियों के फेल होने, रोजाना छह घंटे डायलिसिस, मल्टी ऑर्गन फेल्योर और कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने से इनकार किया और अंततः जुड़वां बच्चों को जन्म दिया।
18वें हफ्ते में संक्रमण के कारण जागृति की दोनों किडनियां खराब हो गईं। डॉक्टरों ने खतरे को देखते हुए गर्भ समापन की सलाह दी, लेकिन जागृति अपने फैसले पर अडिग रहीं। पांचवें महीने में डायलिसिस के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और करीब 7 मिनट तक दिल की धड़कन बंद रही। समय पर सीपीआर और वेंटिलेटर सपोर्ट से उनकी जान बचाई जा सकी।
इसके बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ। 30वें हफ्ते में उन्हें पीलिया हो गया, जिससे मां और गर्भस्थ शिशुओं दोनों की जान को खतरा पैदा हो गया। डॉक्टरों ने तत्काल सीजर कर डिलीवरी कराई। समय से पहले जन्मे जुड़वां बच्चों—एक बेटा (835 ग्राम) और एक बेटी (1130 ग्राम)—को लंबे समय तक NICU में रखा गया। अब दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और हाल ही में अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए हैं।

जागृति का इलाज कर रहे नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सनी मोदी के अनुसार, मेडिकल लिटरेचर में यह अपनी तरह का दुनिया का पहला मामला है, जिसमें डायलिसिस पर चल रही गर्भवती महिला को कार्डियक अरेस्ट आने के बावजूद सफल प्रेग्नेंसी और सुरक्षित डिलीवरी संभव हुई।
फिलहाल जागृति सप्ताह में दो बार डायलिसिस पर हैं और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए SOTO में पंजीकरण करा चुकी हैं। कठिन संघर्ष के बाद मां और बच्चों के सुरक्षित होने से परिवार में खुशी का माहौल है।
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