असम में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 इस बार कई मायनों में खास हैं।
Hat-trick: नई दिल्ली। असम में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जहां लगातार तीसरी जीत दर्ज करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए जोर लगा रही है। AIUDF भी इस बार अहम भूमिका में नजर आ सकती है।
चुनाव में अवैध घुसपैठ, जनसांख्यिकी में बदलाव और चाय बागानों की बदहाल स्थिति प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। इन मुद्दों पर राजनीतिक दल लगातार एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार नई रणनीति के तहत अपने गठबंधन समीकरण बदले हैं। पार्टी ने एआईयूडीएफ से दूरी बनाते हुए असम जातीय परिषद, ऑल इंडिया हिल लीडर्स कांफ्रेंस और माकपा समेत कई दलों के साथ गठबंधन किया है। साथ ही, पार्टी ने गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से उम्मीदवार बनाया है।
दूसरी ओर, भाजपा ने अपने पारंपरिक सहयोगी असम गण परिषद के साथ गठबंधन बरकरार रखते हुए बोडोलैंड क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने के लिए बीपीएफ को भी साथ लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी चुनाव मैदान में उतरी है।
राज्य की राजनीति में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का प्रभाव लंबे समय तक रहा, लेकिन 2016 और 2021 के चुनावों में भाजपा ने इस समीकरण को बदलने में सफलता हासिल की। इस बार भी पार्टी इसी रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश में है।
परिसीमन के बाद यह पहला चुनाव है, जिससे सियासी गणित पूरी तरह बदल गया है। 126 सीटों वाली विधानसभा में अब 9 सीटें अनुसूचित जाति और 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। नई सीमाओं के कारण कई सीटों पर मतदाताओं का स्वरूप बदला है, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपर असम में भाजपा की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जबकि लोअर असम और बराक घाटी में विपक्षी दल चुनौती पेश कर सकते हैं। बदलते समीकरणों के बीच इस बार कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने लगातार तीसरी जीत (हैट्रिक) का लक्ष्य
- कांग्रेस के सामने सत्ता में वापसी की चुनौती
- AIUDF के लिए किंगमेकर बनने का मौका
⚠️ मुख्य चुनावी मुद्दे
इस बार चुनाव में कई बड़े मुद्दे केंद्र में हैं:
- अवैध घुसपैठ और बदलती जनसांख्यिकी
- लाखों की संख्या में अवैध अप्रवासी
- चाय बगानों की स्थिति और मजदूरों की समस्याएं
👤 कांग्रेस की नई रणनीति और गठबंधन
- गौरव गोगोई को जोरहाट से उम्मीदवार बनाया गया
- कांग्रेस ने इस बार AIUDF से दूरी बनाई
- इसके बजाय 10 दलों के साथ गठबंधन किया, जिनमें:
- असम जातीय परिषद
- ऑल इंडिया हिल लीडर्स कांफ्रेंस
- माकपा शामिल हैं
👉 कांग्रेस का फोकस नए सामाजिक समीकरण बनाने पर है।
🔶 भाजपा की रणनीति और नेतृत्व
- चुनाव पूरी तरह हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व के इर्द-गिर्द
- सहयोगी दल:
- असम गण परिषद
- बीपीएफ
👉 भाजपा ने:
- हिंदुत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा (घुसपैठ मुद्दा) को प्रमुख बनाया
- महिलाओं को आर्थिक सहायता (37 लाख महिलाओं को ₹8000) देकर महिला वोट बैंक मजबूत किया
🧭 बदला सियासी समीकरण
❗ मुस्लिम वोट बैंक का मिथक टूटा
- पहले करीब 35% मुस्लिम वोटों का बड़ा प्रभाव था
- लेकिन 2016 और 2021 में भाजपा ने समानांतर ध्रुवीकरण से इसे चुनौती दी
📊 अपर असम: भाजपा का गढ़
- 43 सीटों वाला क्षेत्र सत्ता की कुंजी
- पिछले चुनावों में भाजपा को 37–38 सीटें
- यहां सर्बानंद सोनोवाल की मजबूत पकड़
👉 शीर्ष नेतृत्व ने:
- सोनोवाल को क्षेत्र में सक्रिय रहने
- और हिमंता सरमा को आक्रामक बयान से बचने की सलाह दी
🗺️ परिसीमन के बाद पहला चुनाव
- 126 सीटों पर होगा चुनाव
- नई सीमाओं के कारण बदले सामाजिक समीकरण
- आरक्षण स्थिति:
- 9 सीटें SC
- 19 सीटें ST
👉 कई सीटों पर अब नया वोटिंग पैटर्न देखने को मिलेगा
⚖️ क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव
- अपर असम: भाजपा मजबूत
- लोअर असम और बराक घाटी: विपक्ष की पकड़
👉 कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना
साभार…
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