सोल्डर खोदकर पीडब्ल्यूडी की सड़क की बर्बाद

Possibility of accidents:बैतूल। जल निगम ने पाइप लाइन डालने के लिए पीडब्ल्यूडी की सड़क के सोल्डर खोदकर सडक़ को बर्बाद कर दिया है जिससे जहां पीडब्ल्यूडी को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है वहीं ग्रामीणों को भी आवागमन करने में परेशानी उठाने मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा सोल्डर को खोद दिए जाने से हादसों की संभावना भी बढ़ गई है। मामला बैतूल विकास खंड के खेड़ी- सूरगांव-सांवगा मार्ग का है जहां लोक निर्माण विभाग ने सड़क बनाई थी और इसके आजू-बाजू मेें सोल्डर भी बनाए गए थे। जल निगम के द्वारा कराए जा रहे कार्य को लेकर बिना अनुमति के सोल्डर खोद दिए गए हैं जिसको लेकर लोक निर्माण विभाग ने जल निगम को सोल्डर को पहुंचाए गए नुकसान की भरपाई करने के लिए पत्र लिखा है।
क्या है मामला?
लोक निर्माण विभाग के बैतूल एसडीओ हरिओम परमार से सांध्य दैनिक बैतूलवाणी ने चर्चा की तो उन्होंने बताया कि खेड़ी-सूरगांव-सांवगा सड़क के बाजू में बनाए गए सोल्डर को लगभग 870 मीटर बिना अनुमति के खोद दिया गया है। इस खुदाई से विभाग को लगभग 5 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इसको लेकर जल निगम के अधिकारियों को सोल्डर की मरम्मत कराने के लिए पत्र लिखा है। श्री परमार ने बताया कि जल निगम समय सीमा में ठेकेदार से कार्य नहीं कराता है तो पीडब्ल्यूडी विभाग कानूनी कार्यवाही करेगा।
एलएन मालवीय करा रहे कार्य
जल निगम के सबइंजीनियर निलेश सिंह से सांध्य दैनिक बैतूलवाणी ने चर्चा की तो उन्होंने बताया कि मेंढा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के तहत 241 गांव के लिए परियोजना का कार्य किया जा रहा है। यह कार्य ठेकेदार एलएन मालवीय भोपाल की कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। इस कार्य के लिए पाइप लाइन बिछाई जा रही है इसी को लेकर सडक़ के किनारे सोल्डर को खोदा गया है। ये गोराखार के पास सोल्डर खोदे गए हैं। श्री सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने इस मामले को लेकर विभाग से चर्चा की है। संबंधित ठेकेदार को रिप्लेस कराने का निर्देश दिया गया है। जब उनसे पूछा गया कि विभाग ने इस कार्य के लिए पीडब्ल्यूडी से अनुमति क्यों नहीं ली तो इसको लेकर सही जवाब नहीं दे पाए।
इनका कहना…
सोल्डर खोदने के मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने पत्र लिखा है। इसको लेकर ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है कि जो डैमेज किया गया है उसे जल्द ठीक किया जाए और भविष्य में बिना अनुमति के इस तरह के कार्य ना किए जाएं।
अविनाश दिवाकर, जीएम, जल निगम
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