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Sign: प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पर बंधा काला धागा: आस्था, साधना और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पर बंधा काला

Sign: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विश्व के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिनकी एक झलक पाने के लिए दुनिया उत्सुक रहती है। उनके पहनावे, भाषण शैली और जीवनशैली पर वैश्विक मीडिया की लगातार नजर रहती है। ऐसे में वर्षों से उनकी दाहिनी कलाई पर बंधा एक साधारण सा काला धागा अक्सर लोगों की जिज्ञासा का विषय बनता है। करोड़ों रुपये की घड़ियों और आभूषणों से दूर रहने वाले प्रधानमंत्री इस धागे को विशेष महत्व क्यों देते हैं—इसके पीछे आस्था, परंपरा और साधना की गहरी कहानी जुड़ी मानी जाती है।

वडनगर से दिल्ली तक: अंबा माता की आस्था

इस धागे से जुड़ी मान्यताओं की जड़ें प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान वडनगर (गुजरात) से जुड़ी हैं। यहां स्थित मां अंबा (मां वाराही) का मंदिर मोदी परिवार की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री बचपन से ही मां शक्ति के अनन्य उपासक रहे हैं। मान्यता है कि यह कोई साधारण धागा नहीं, बल्कि विशेष तिथियों—विशेषकर नवरात्रि—में मंत्रोच्चार के साथ अभिमंत्रित किया गया धागा होता है, जिसे वे प्रसाद और रक्षा-सूत्र के रूप में धारण करते हैं। यह उनकी सांस्कृतिक जड़ों और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

काले रंग का प्रतीकात्मक अर्थ

कई लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन भारतीय परंपराओं में रंगों का अपना प्रतीकात्मक महत्व है।

  • आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने वाला माना जाता है।
  • कुछ मान्यताओं में इसे व्यक्ति के आभामंडल (Aura) की रक्षा से जोड़ा जाता है, खासकर ऐसे व्यक्ति के लिए जो प्रतिदिन लाखों लोगों के संपर्क में रहता हो।

नवरात्रि और साधना से जुड़ा अनुशासन

एक रोचक तथ्य यह भी बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी इस धागे को अपनी इच्छा से नहीं बदलते। वे इसे साल में केवल दो बार—चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान ही बदलते हैं। पिछले कई दशकों से वे नवरात्रि के नौ दिनों में कठोर उपवास और साधना करते रहे हैं। जानकारों के अनुसार, इसी अवधि में नया अभिमंत्रित धागा धारण करना उनके आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मसंयम का प्रतीक है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण की मान्यताएं

कुछ वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार, काले रंग को शनि ग्रह से जोड़ा जाता है, जो कर्म, अनुशासन और जनसेवा का कारक माना जाता है। वहीं राजनीति और कूटनीति में आने वाली अदृश्य चुनौतियों से बचाव के लिए इसे प्रतीकात्मक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है। हालांकि, ये सभी बातें मान्यताओं और विश्वासों पर आधारित हैं।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

डिजिटल इंडिया और वैश्विक मंच पर सक्रिय नेतृत्व के दौर में प्रधानमंत्री मोदी का यह काला धागा एक संदेश देता है—“विरासत भी, विकास भी।” यह दिखाता है कि आधुनिकता की ऊंचाइयों को छूते हुए भी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान से जुड़ा रहा जा सकता है। उनके लिए यह किसी तरह की व्यक्तिगत ब्रांडिंग नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ी निजी पहचान का हिस्सा माना जाता है।

साभार… 

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