माचना नदी के किनारे किसान ने उठाकर लाया था अस्पताल
Treatment: बैतूल। एक घायल मोर को त्वरित उपचार मिलने से उसकी जान बच गई है। मोर नदी किनारे मूर्छित हालत में पड़ा हुआ था। दक्षिण वन मंडल सामान्य के ताप्ती वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेड़ीसावलीगढ़ के समीप डहरगांव गांव में माचना नदी किनारे खेती कर रहे एक किसान को एक राष्ट्रीय पक्षी मोर मूर्छित अवस्था में मिला। संवेदनशीलता दिखाते हुए किसान ने तत्काल इसकी सूचना सहायक परिक्षेत्र अधिकारी ओमप्रकाश मालवी को दी। सूचना मिलते ही कनारा बीट गार्ड शैलेंद्र द्विवेदी मौके पर पहुंचे और घायल मोर को सुरक्षित रूप से खेड़ीसावलीगढ़ पशु चिकित्सालय लाया गया।
निगरानी में रखा 24 घंटे
यहां पदस्थ शल्य चिकित्सक डॉ. प्रीति बंसल ने तत्परता और कुशलता का परिचय देते हुए मोर का इलाज शुरू किया। लगातार 24 घंटे की निगरानी और सफल उपचार के बाद मोर की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वह दोबारा उड़ान भरने में सक्षम हो गया। इससे पहले भी डॉ. प्रीति बंसल द्वारा एक सांप की शल्य चिकित्सा कर उसकी जान बचाई जा चुकी है, जो उनके जीव-जंतुओं के प्रति समर्पण और करुणा को दर्शाता है।
उपचार से मिला नया जीवन
डॉ. प्रीति बंसल ने पहले मोर को स्नेह और संरक्षण दिया, फिर चिकित्सकीय उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया। वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की समन्वित कार्यवाही से राष्ट्रीय पक्षी की जान बच पाई। बताया गया है कि आज शाम मोर को सुरक्षित रूप से जंगल में स्वच्छंद छोड़ दिया जाएगा, जहां वह फिर से प्राकृतिक जीवन जी सकेगा। यह घटना न केवल प्रशासनिक तत्परता का उदाहरण है, बल्कि मानवीय संवेदना और जीव संरक्षण की प्रेरक मिसाल भी है।
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