भाजपा कार्यालय घेराव के दौरान वॉटर कैनन, कई कार्यकर्ता गिरे
Violent protests: भोपाल। नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू जिला अदालत द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर संज्ञान न लेने के फैसले के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति गरमा गई है। फैसले के तुरंत बाद राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय के घेराव का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया।
जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने लगे, तो पुलिस ने हालात काबू में रखने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। तेज पानी की बौछारों से कई कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर गिर पड़े, वहीं कुछ को हल्की चोटें भी आईं। कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जीतू पटवारी मौके पर मौजूद, पुलिस से तीखी नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं मौके पर मौजूद रहे। पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और बसों में बैठाकर थाने ले जाने लगी।
इसी दौरान पटवारी के इशारे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस बसों को घेर लिया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल रहीं।
कांग्रेस का आरोप—शांतिपूर्ण विरोध को दबा रही सरकार
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई आवश्यक थी।
जीतू पटवारी का तीखा बयान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा,
“भाजपा झूठे मुकदमे लगाकर विपक्षी नेताओं को बदनाम करने का षड्यंत्र कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी और ED का असली चेहरा आज देश के सामने बेनकाब हो गया है। गांधी परिवार ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है—शहादत भी दी है और संपत्ति भी। कांग्रेस इन झूठे मामलों से डरने वाली नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा,
“मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, हम राहुल गांधी जी के बब्बर शेर हैं। आपकी लाठी और पानी की बौछार से डरने वाले नहीं हैं। हम जनजागरण करेंगे और भाजपा की सच्चाई हर नागरिक तक पहुंचाएंगे।”
क्या कहा अदालत ने
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ED द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट किसी वैध एफआईआर पर आधारित नहीं थी, इसलिए धनशोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत उस पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना मुकदमा आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2012 से चर्चा में है, जब एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडियन से जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर आरोप लगे थे। बाद में ED ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनाते हुए जांच शुरू की थी, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं के नाम सामने आए थे।
साभार…
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