Tuesday , 10 March 2026
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Worried: ठेकेदार ने अधूरी छोड़ दी नलजल योजना

ठेकेदार ने अधूरी छोड़ दी

अम्बाड़ा पंचायत में पानी के लिए परेशान हो रहे ग्रामीण

Worried: आठनेर। केंद्र एवं राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अंतर्गत प्रत्येक गांव में नल-जल योजना लागू कर हर घर जल देने सरकार द्वारा अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोगों को प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो। लेकिन करोड़ों रुपए लागत की नल-जल योजना में ठेकेदार और विभाग की ऐसी मिलीभगत चली की यह योजना गांवों में खानापूर्ति साबित हो रही है। मामला आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत अम्बाडा में देखने को मिला जहां 85 लाख रुपए से अधिक स्वीकृत नल-जल योजना का एक वर्ष पुर्व ठेकेदार द्वारा कार्य किया गया ठेकेदार द्वारा नवीन अम्बाडा एवं भोजू ढाना में पाइपलाइन डालकर खानापूर्ति कर दीं तो वहीं ग्राम नत्थू ढाना में आज तक पाइपलाइन नहीं डाली गई। एक वर्ष से अधिक समय से नल-जल योजना का कार्य अधुरा पड़ा है और ठेकेदार सहाब नदारद है।


तराई नहीं होने से टंकी में आई दरार


नत्थू ढाना के ग्रामीणों ने बताया कि एक वर्ष से पेयजल टंकी का कार्य अधुरा पड़ा है सबसे लापरवाही की बात यह है कि एक वर्ष से अधुरी बनी टंकी की तराई तक नहीं हुई ग्रामीणों ने कहां कि लाखों रुपए लागत की टंकी और अधुरे जीने में दरारे पड़ रही है। वहीं टंकी के लिए बने सप्लाई टेंक का मुंह खुला होने से स्कूली छोटे बच्चों का उसमें गिरने का खतरा बना रहता है क्योंकि स्कूल के बच्चे वहा खेलते नज़र आते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया की मामले की शिकायत पीएचई विभाग जनपद पंचायत एवं 181 पर की परन्तु ठेकेदार की महेरवानी से आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।


ग्रामीणों को पेयजल के लिए हो रही परेशानी


नत्थू ढाना में आज भी टुटी फुटी पुरानी पंचायत द्वारा डाली पाइपलाइन से सप्लाई हो रही है ग्रामीणों ने बताया कि पाइपलाइन जहा तहां फुटी होने से उसमें गंदा पानी जाता है ठेकेदार को पाइपलाइन डालने पर ज़वाब मिलता है कि जितना इस्टीमेट था का कर चुका हूं। जब नया स्टीमेट आएगा तो काम करूंगा। करोड़ों रुपए लागत से स्वीकृत नल-जल योजना का कार्य जिले के सैकड़ों गांवों में अधूरी पड़ी है, ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत से यह योजना इस कदर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी की कही पाइप फुट रहे हैं तो कहीं बोर में पानी नहीं कही बीजली कनेक्शन नहीं तो कुछ गांवों में टंकी सोपीस बनी पड़ी है यूं कहा जाए कि ग्राम अंचलों में नल-जल योजना के बेहाल है।

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