New State President: लखनऊ : उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश के 98 में से 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और अब पार्टी का फोकस नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन पर है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर लगातार मंथन कर रहा है और यूपी के शीर्ष नेताओं से रायशुमारी भी पूरी हो चुकी है।
प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महासचिव बीएल संतोष सहित शीर्ष पदाधिकारी रणनीति तैयार कर रहे हैं। आगामी पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए हाईकमान जल्द निर्णय लेने के मूड में है।
प्रदेश नेतृत्व का चयन इस बार सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह हरियाणा, राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों के जातीय और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा। वर्तमान में इन राज्यों में अलग-अलग जातीय समूहों को नेतृत्व दिया गया है, ऐसे में यूपी के लिए उपयुक्त सामाजिक समीकरण तलाशा जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती अगड़े और पिछड़े वर्ग के बीच संतुलन की है। पार्टी में दो मत सामने आए हैं—एक पक्ष का कहना है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सामान्य वर्ग से हैं तो प्रदेश अध्यक्ष पिछड़े वर्ग को मिलना चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष 2017 की तरह दोनों पद अगड़ी जाति को देने के समर्थन में है।
दावेदारी में कई नाम शामिल हैं। पिछड़े वर्ग से केशव प्रसाद मौर्य, भूपेंद्र सिंह चौधरी, बीएल वर्मा, स्वतंत्र देव सिंह, अमरपाल मौर्य और साध्वी निरंजन ज्योति जैसे नाम प्रमुख हैं। वहीं अगड़े वर्ग से ब्रजेश पाठक, दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा और महेंद्रनाथ पांडेय के नाम चर्चा में हैं। दलित नेतृत्व में विद्यासागर सोनकर, रामशंकर कठेरिया और बेबी रानी मौर्य भी संभावित दावेदार हैं।
इस बार BJP महिला कार्ड भी खेल सकती है। पार्टी को पिछले चुनावों में महिला मतदाताओं का जबरदस्त समर्थन मिला है और 33% आरक्षण के वादे के बाद महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाना पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में प्रियंका रावत, रेखा वर्मा या बेबी रानी मौर्य जैसे नाम चौंकाने वाले विकल्प हो सकते हैं।
पार्टी नेतृत्व धार्मिक तिथियों और शुभ मुहूर्तों का भी ध्यान रखता है। यदि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति 14 दिसंबर तक नहीं होती है, तो खरमास के कारण फैसला 15 जनवरी के बाद ही लिया जाएगा। कुल मिलाकर, यूपी भाजपा में नया प्रदेश अध्यक्ष किसी भी समय घोषित हो सकता है और पार्टी की परंपरा को देखते हुए यह नाम चौंकाने वाला भी हो सकता है।
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