छुट्टी से लौटते ही निजी विश्वविद्यालय में दिया विवादित उदाहरण, PWD मंत्री पर इशारों-इशारों में निशाना
Storm: इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय छुट्टी से लौटते ही फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इंदौर के एक निजी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ऐसा बयान दे दिया, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। यह कार्यक्रम स्कूली शिक्षा और बच्चों के चरित्र निर्माण विषय पर आयोजित किया गया था। मंच से संबोधन के दौरान विजयवर्गीय ने एक उदाहरण देते हुए कहा—
“अगर किसी पिता के पास PWD मंत्री का पद हो और उसका बेटा कपड़ों के ठेकेदार बन जाए, तो ऐसे में बच्चों का चरित्र निर्माण कैसे होगा?”
उनके इस बयान को प्रदेश के एक वरिष्ठ लोक निर्माण मंत्री पर इशारों-इशारों में तंज माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
भागीरथपुरा विवाद के बाद पहली प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि विजयवर्गीय भागीरथपुरा प्रकरण के बाद काफी समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए थे। छुट्टी से लौटने के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक बयान माना जा रहा है। उनका यह बयान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह भ्रष्टाचार, ठेकेदारी और सत्ता के दुरुपयोग जैसे संवेदनशील मुद्दों को छूता है।
पहले भी विवादों में रहे हैं विजयवर्गीय
कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक और बेधड़क बयानों के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनके बयान खुद भारतीय जनता पार्टी के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं। इंदौर की चर्चित घटना के दौरान उनका ‘घंटा’ वाला बयान भी काफी विवादों में रहा था, जिसकी गूंज प्रदेशभर में सुनाई दी थी।
सियासी गलियारों में तेज़ हुई चर्चा
अब सवाल यह है कि
- विजयवर्गीय का निशाना आखिर किस PWD मंत्री पर था?
- क्या यह बयान पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति का संकेत है?
- या फिर यह भ्रष्टाचार के खिलाफ खुला हमला?
इन सवालों के बीच मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।
साभार…
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