पैरवी अधिवक्ता सजल गर्ग एवं अवध हजारे ने की
Acquitted: बैतूल। आरक्षी गृह कोतवाली बैतूल ने पाढर चिकित्सालय के दोनों प्रमुख डॉक्टर्स एवं एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भादवि के तहत धारा 304/34 का प्रकरण अपराध क्रमांक ८50/2021 के तहत कायम किया था। इस प्रकरण में बनाए गए सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय सत्र न्यायाधीश बैतूल श्री दिनेश चंद्र थपलियाल ने दोषमुक्त कर दिया गया है। दो वर्षों तक चले इस प्रकरण में दोनों पक्षों के 11 व्यक्तियों ने साक्ष्य दिए थे। प्रकरण में आरोपियों की ओर से पैरवी अधिवक्ता सजल गर्ग एवं अधिवक्ता अवध हजारे ने की।
एक नजर में पूरा मामला
अभियोजन का कथानक इस प्रकार है कि प्रार्थी जीवनलाल अपने छोटे पुत्र पंकज हजारे का पथरी की बीमारी का उपचार कराने के लिए दिनांक 6 अप्रैल 2021 को पाढर अस्पताल लाया था। दूसरे दिन जांच के लिए प्रार्थी, उसका लड़का पंकज और भांजा गोलू कोडले भी पाढर अस्पताल पहुंचे थे। यहां पंकज की जांच कर उसे भर्ती कर लिया गया। पाढर के चिकित्सकों ने अगले दिन सुबह 9 बजे पंकज को आपरेशन के लिए आपरेशन थियेटर में ले गए और बाद में करीब 11 बजे पंकज को आपरेशन थियेटर से बाहर निकाला तब वह बेहोशी की हालत में था। इसके पश्चात उसे आईसीयू में भर्ती कर दिया गया लेकिन 10 अप्रैल 2021 को ही सुबह 9 बजे पाढर के डॉक्टरों ने प्रार्थी जीवनलाल को यह जानकारी दी कि उसके पुत्र पंकज की मृत्यु हो गई है।
प्रकरण में यह थे गवाह
पाढर अस्पताल में उपचार के दौरान पंकज की मृत्यु को डॉक्टरों द्वारा लापरवाही बरतने की आशंका प्रकट किए जाने पर पुलिस ने मर्ग जांच में दवाएं और पेंशेंट की फाइल आदि जब्त की थी और संबंधित सभी चिकित्सीय दस्तावेज सीएमएचओ जिला अस्पताल बैतूल और मेडिकल बोर्ड को भेजे गए। प्रकरण में डॉ. आशीष चौधरी, डॉ. राजीव चौधरी एवं मेल नर्स सोलोमन को अभियुक्त बनाया था। अभियोजन के आरोपों को सिद्ध करने के लिए राजबन गोस्वामी, जीवनीलाल हजारे, रामभाऊ कुंभारे, डॉ. प्रमोद मालवीय, विशाल हजारे, गोलू उर्फ राजेंद्र, लाल सिंह राठौर, जगदीश रैकवार, बंटी हजारे, डॉ. रानू वर्मा, डॉ. आरके धुर्वे, डॉ.अजय माहौरे एवं रत्नाकर हिंगवे निरीक्षक पुलिस के कथन करवाए गए।
इन्होंने की प्रकरण में पैरवी
अभियोजन उसके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर आरोपीगणों के विरूद्ध यह सिद्ध करने में असफल रहा और मृतक की मृत्यु का कोई स्पष्ट कारण सिद्ध नहीं हो सका तथा मृत्यु के कारणों के संबंध में गठित जांच कमेटी भी मृत्यु का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सकी थी। फलत: माननीय न्यायलय ने सत्र प्रकरण 31/2022 में सभी आरोपियों कल पूरी तरह से दोष मुक्त कर दिया। आरोपियों की ओर से पैरवी अधिवक्ता सजल गर्ग एवं अधिवक्ता अवध हजारे ने की।
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