बैतूलवाणी के रू-ब-रू कार्यक्रम में बोले डॉ. नूतन राठी
Betulwani Interview:बैतूल। बैतूल जिले के पहले पॉडकास्ट बैतूलवाणी के रू-ब-रू कार्यक्रम में जिले के प्रसिद्ध चिकित्सक एवं जीडी राठी हास्पीटल के संचालक नूतन राठी से एंकर संजय शुक्ला द्वारा विभिन्न विषयों परकी गई चर्चा के संपादित अंश प्रस्तुत है:-
संजय शुक्ला- आपके परिवार में कितने डॉक्टर्स हैं और कब से हैं?
डॉ. नूतन राठी- चिकित्सा क्षेत्र में सेवा करने का कार्य पिछली पीढ़ी से मिला है। मेरे पिता गोवर्धनदास राठी बीएएमएस डॉक्टर थे। वे 1977 से चिकित्सा सेवा का कार्य कर रहे हैं। और शुरू में जो अपना गृह नगर शिवपुरी है, मेरे पिता ने 7-8 साल वहां सेवा दी फिर बैतूल जिले के केरपानी में उनकी पोस्टिंग हुई थी। उसके बाद परिवार में मैं और मेरा छोटा भाई नितिन राठी डॉक्टर बने। हम दोनों भाईयों की पत्नियां भी डॉक्टर हैं। स्मिता राठी और दीप्ति राठी हैं। मेरे दो कजिन ब्रदर भी डॉक्टर हैं। इस तरह से हमारे परिवार में भी कई डॉक्टर हैं।
संजय शुक्ला- आपका पूरा परिवार कृष्ण भक्त हैं, बताते हैं कि आपके घर में कृष्ण भगवान के लिए अलग से रोज भोग बनता है और इसके लिए रसोई भी अलग से हैं। इसकी प्रेरणा कहां से मिली?
डॉ. नूतन राठी- 200 सालों से हमारे यहां ठाकुर जी की सेवा होते आ रही है। हम कृष्ण जी को ठाकुर जी बोलते हैं। पहले शिवपुरी में और उसके बाद बैतूल में यह सेवा की जा रही है, और दिन के हर पहर में हर तरह से उनकी सेवा की जाती है। उनके भोग के लिए हमारे निवास पर एक अलग से रसोई भी है। इसकी प्रेरणा हमारे परिवार से ही प्राप्त हुई है।
संजय शुक्ला- आपके चिकित्सालय में कौन-कौन सी सुविधाएं वर्तमान में हैं। आप नया हास्पिटल भी बना रहे हैं इस बारे में बताएं?
डॉ. नूतन राठी- समय के साथ अपडेट होना चाहिए। हमने पहले छोटा हास्पिटल शुरू किया था जो अब मल्टीस्पेशलिस्ट हो गया है। हाई प्रेगेंसी, एक्सीडेंट, हड्डी सहित अन्य आपरेशन किए जाते हैं। अब हम नए हास्पिटल में ऐसी सुविधा लाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे मरीज बाहर जाने से बच सके। बैतूल को एक हाईक्लास आईसीयू, सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल बनाकर दिया जाए इसी पर काम चल रहा है।
संजय शुक्ला- आप सोते कब हैं, क्योंकि रात में आपको कभी भी फोन लगाने पर आप तुरंत चिकित्सालय आ जाते हैं?
डॉ. नूतन राठी-हमने सेवा ही ऐसी चुनी है जिसमें समय नहीं देखा जाता है। लोगों की और मरीजों की डॉक्टर से बहुत अपेक्षाएं जुड़ी होती है। इसी अपेक्षा को पूरा करने का प्रयास किया जाता है। इसमें आपको पर्सनल और फैमिली लाइफ के साथ कंप्रमाइस करना पड़ता है क्योंकि मरीज आपके पास बड़ी आशा से आता है इसलिए इसमें समय नहीं देखा जाता है।
संजय शुक्ला- आपने हाल ही में एक आधुनिक एमआरआई सेंटर खोला है क्या इसमें आयुष्मान धारकों को भी सुविधा है?
डॉ. नूतन राठी-एमआरआई सेंटर खोलना एक बड़ा टॉस्क है। उसका मेंटनेंस करना बड़ा कठिन है। बैतूल जैसी छोटी जगह में हमारी अत्याधुनिक मशीन है। मैंने डॉ. सतीष रघुवंशी, डॉ. प्रीतम कुमरे दोनों रेडियालॉजिस्ट हैं उनके सहयोग से ही इसे शुरू किया है। आयुष्मान कार्ड अभी प्रोसेस में है।
संजय शुक्ला- जिला चिकित्सालय बैतूल में आप सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में वहां करोड़ों का भवन तो बन गया है लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है। एक डॉक्टर के नाते आप इस बारे में क्या कहेंगे?
डॉ. नूतन राठी-जब मैं 2008-2009 में जिला अस्पताल में था। तब पुराना अस्पताल था इंफ्रास्ट्रक्चर भी काफी सीमित था और साथ में डॉक्टरों की भी कमी थी। उस समय हम लोग 8-10 नाइट ड्यूटी करते थे। नई बिल्डिंग बहुत अच्छी बनी है लेकिन स्पेशलिस्ट का होना भी जरूरी है। अब सरकार धीरे-धीरे डॉक्टरों को भी पदस्थ करेगी ऐसा मेरा मानना है।
संजय शुक्ला- डॉक्टर योगेश पंडाग्रे के विधायक बनने के बाद से जिले में प्रमुख राजनैतिक भाजपा और कांग्रेस से जुडकऱ कई डॉक्टर्स राजनीति में आने के लिए सक्रिय हो गए हैं, क्या डॉक्टर राजनीति में आकर दोनों क्षेत्रों के साथ न्याय कर सकते हैं, इस बारे में आपकी व्यक्तिगत राय बताएं?
डॉ. नूतन राठी-ये बात सही है कि कोई डॉक्टर यदि राजनीति में आता है तो स्वास्थ्य नीति को तो समझता ही है और जन सेवा की भावना भी रहती है। और लोगों से उसका संवाद भी रहता है। डॉक्टर यदि राजनीति में आता है तो वह राजनीति के लिए बड़ा सकारात्मक है। क्योंकि दूसरे लोगों की तुलना में वो न्याय प्रक्रिया और योजनाओं का ज्यादा जानकार होता है। मेरे लिए दोनों पेशे के साथ एक साथ न्याय करना बहुत मुश्किल है। लेकिन डॉक्टर पंडाग्रे ने इसके साथ न्याय किया है। और साबित किया है कि राजनीति और चिकित्सा क्षेत्र में एक साथ काम किया जा सकता है। उनसे ही प्रोत्साहित होकर कई और डॉक्टर भी राजनीति में आने का सोचने लगे हैं।
संजय शुक्ला- कोविड-19 के दौरान आपके संस्थान पर कई तरह के आरोपों की चर्चा रही इस बारे में बताएं वास्तविकता क्या थी?
डॉ. नूतन राठी-कोविड ऐसी आपदा थी, जिसमें डॉक्टर, मरीज हो या प्रशासन सबने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर काम किया है। सीमित संसाधन और समाज में तनाव का माहौल, अनिश्चतता का माहौल था। जब ऐसी अनिश्चितता होती है तो अफवाएं फैलना भी स्वाभाविक है। आरोप लगना कॉमन बात है। सबसे बड़ी बात होती है संवादहीनता, हम पर जो भी आरोप थे उसके हमने पेपर प्रस्तुत किए और कोई भी आरोप साबित नहीं हुए।
संजय शुक्ला- यह आरोप लगभग सभी डॉक्टरों पर लगते हैं कि वह कमीशन के चक्कर में कंपनी विशेष की महंगी दवाईयां लिखते हैं और बाद में वो कंपनी विशेष डॉक्टरों को विदेश यात्रा करती है इसमें कितनी सच्चाई है?
डॉ. नूतन राठी-जहां तक मैं जानता हूं अधिकतर डॉक्टर मरीज की जरूरत, बीमारी के हिसाब से दवाई लिखते हैं लेकिन एकाध अपवाद हो सकता है। लेकिन उसके कारण अच्छा काम करने वाले डॉक्टरों पर आरोप लगाना उचित नहीं है। सिस्टम सुधारने के लिए पारदर्शिता होना चाहिए, मरीज को जैनरिक दवाई लिखना चाहिए।
संजय शुक्ला- क्या आप मानते हैं कि वर्तमान में चिकित्सा धर्म नहीं व्यवसाय बन गया है?
डॉ. नूतन राठी-आज हास्पिटल चलाने के लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता होती है। मेन पॉवर की आवश्यकता होती है तो बड़ा खर्चा आता है। व्यवसायिक पहलु से मैं इंकार नहीं कर सकता। पर आज भी किसी चिकित्सक का धर्म मानव सेवा, मरीज की सेवा ही है।
संजय शुक्ला- आप मरीज की काउंसलिंग बहुत ही शानदार तरीके से करते हैं जिससे मरीज आधा तो वैसे ही ठीक हो जाता है, इस बारे में बताएं?
डॉ. नूतन राठी- मुझे ये लगता है कि शारीरिक बीमारी हो या मानसिक बीमारी के लिए जितनी दवाईयां जरूरी है उतनी ही काउंसलिंग भी जरूरी है। काउंसलिंग से आप मरीज को उसकी बीमारी के बारे में बता सकते हैं। लाइफ स्टाइल के बारे में बता सकते हो। काउंसलिंग परिवार की भी होना चाहिए। कई बार छोटी सी बीमारी को समाज बड़ा हौव्वा बना देता है, इसलिए काउंसलिंग से यह समस्या दूर हो जाती है।
संजय शुक्ला- आप मरीज की माली हालत देखकर कई बार बिल में भी कटौती कर देते हैं। क्या आप पुण्य कमाने के लिए ऐसा करते हैं?
डॉ. नूतन राठी-मरीज कुछ देकर भले ही ना जाए लेकिन वह अनुभव जरूर देकर जाता है। कई बार मैं देखता हूं कि यदि कोई जरूरतमंद मरीज है तो उसकी मदद किसी ना किसी माध्यम से कर देता हूं ताकि उसे इलाज मिल सके।
संजय शुक्ला- आयुष्मान कार्ड को लेकर यह बात भी सामने आती है कि डॉक्टर आयुष्मान कार्ड से भी पैसा ले लेते हैं और मरीज से भी। इस बारे में आप क्या कहेंगे?
डॉ. नूतन राठी-आयुष्मान की प्रक्रिया इतनी पारदर्शी हो गई है कि उसमें ये करना असंभव लगता है। ये भी अपवाद जैसे एक-दो लोग हो सकते हैं। अब तो एआई से हर चीज सामने आ जाती है।
संजय शुक्ला- कई निजी अस्पताल मरीज की मौत के बाद भी बॉडी नहीं देते हैं कि पहले बिल चुकाओ। इस बारे में आप क्या कहेंगे?
डॉ. नूतन राठी-परिजन की मृत्यु हो जाए तो वैसे ही परिवार काफी सदमे में आ जाता है। ये करना एकदम अमानवीय है मैं इसका कहीं सपोर्ट नहीं करता। ऐसा कृत्य कोई खराब आदमी ही कर सकता है।
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