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Fastag Parking: एयरपोर्ट की फास्टैग पार्किंग बनी यात्रियों के लिए सिरदर्द

एयरपोर्ट की फास्टैग पार्किंग बनी

7 मिनट की छूट सिर्फ कागजों में, एग्जिट गेट की लंबी कतारों में कट रहे 20 से 55 रुपये

Fastag Parking: इंदौर। देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल पर यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई फास्टैग आधारित पार्किंग व्यवस्था अब यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। ‘पिक एंड ड्रॉप’ के लिए भले ही एयरपोर्ट प्रबंधन ने 7 मिनट 59 सेकंड की समय-सीमा तय कर रखी हो, लेकिन निकास द्वार पर लगने वाली लंबी कतारें इस छूट को पूरी तरह बेअसर बना रही हैं।

स्थिति यह है कि कई वाहन चालक समय सीमा के भीतर अपने परिजनों को उतारकर निकलने की कोशिश करते हैं, लेकिन एग्जिट गेट पर जाम में फंसने के कारण समय सीमा पार हो जाती है और गेट पर पहुंचते ही फास्टैग से पार्किंग शुल्क अपने आप कट जाता है।


एंट्री होते ही फास्टैग एक्टिव, लेकिन कोई रसीद नहीं

एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश करते ही वाहन का नंबर फास्टैग सिस्टम में दर्ज हो जाता है। निकास के समय यदि तय सीमा से कुछ सेकंड भी अधिक समय हो जाए तो सीधे पार्किंग शुल्क काट लिया जाता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यात्री को समय की कोई रसीद या स्लिप नहीं मिलती, जिससे वह यह साबित कर सके कि उसने तय समय के भीतर ही पिक एंड ड्रॉप किया था।


20 से 55 रुपये तक कट रहे, कर्मचारी भी बेबस

निकास द्वार पर तैनात कर्मचारी केवल कंप्यूटर स्क्रीन दिखाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
कई यात्रियों का कहना है कि कतार में लगने में ही 5 से 7 मिनट लग जाते हैं, और इसी दौरान समय सीमा पार हो जाती है।
परिणामस्वरूप 20 से 55 रुपये तक का पार्किंग शुल्क काट लिया जाता है, जबकि वाहन वास्तव में पार्क ही नहीं किया गया होता।


फास्टैग और कैश की लाइन अलग करने की मांग

एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी के सदस्य सावन लड्ढा का कहना है—
“पिक एंड ड्रॉप के दौरान हमेशा विवाद की स्थिति बनती है। जब तक एंट्री और एग्जिट अलग नहीं होती, तब तक फास्टैग और कैश वाहनों की अलग-अलग लाइन होनी चाहिए, ताकि फास्टैग वाले वाहन बिना रुके निकल सकें।”


डबल डिडक्शन की शिकायतें भी

फास्टैग सिस्टम में एक और गंभीर खामी सामने आ रही है।
यदि फास्टैग काम न करे या यात्री जल्दबाजी में नकद भुगतान कर दे, तब भी सेंसर वाहन का नंबर स्कैन कर फास्टैग से पैसे काट लेता है।

यात्री मनीष कुमार ने बताया कि जनवरी में उन्होंने एयरपोर्ट पर नकद भुगतान किया था, लेकिन बाद में फास्टैग से भी पैसा कट गया।
रिफंड की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि ज्यादातर लोग छोटी रकम के लिए शिकायत ही नहीं करते।


पीक आवर्स में 7 मिनट में निकलना लगभग असंभव

विशेषज्ञों का कहना है कि जब उड़ानों का दबाव ज्यादा होता है, तब 7 मिनट के भीतर एयरपोर्ट से बाहर निकलना लगभग नामुमकिन है।
जब तक निकास द्वारों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती और कतार में लगने वाले समय को शुल्क से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक यात्रियों को यह परेशानी झेलनी पड़ेगी।


सांसद शंकर लालवानी ने दिया समाधान का भरोसा

इस मुद्दे पर इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने कहा—
“पिक एंड ड्रॉप में शुल्क कटने की शिकायतें एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक में रखी गई थीं। अब एंट्री और एग्जिट को अलग किया जा रहा है। बिजासन माता मंदिर की ओर से अलग एग्जिट गेट बनाया जा रहा है। इसके बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।”

साभार…

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