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Message: आरएसएस शताब्दी वर्ष में मोहन भागवत का संदेश: समाज की एकता से ही बनेगा सशक्त भारत

आरएसएस शताब्दी वर्ष में मोहन

मुजफ्फरपुर में सामाजिक सद्भाव गोष्ठी में बोले— ‘भारत में विविधता है, अलगाव नहीं’

Message: मुजफ्फरपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को मुजफ्फरपुर में आयोजित सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज की हर जाति और बिरादरी उन्नति नहीं करेगी, तब तक देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। समाज में आपसी सद्भाव और एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।


जनसंख्या नियंत्रण और हिंदू राष्ट्र पर स्पष्ट राय

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर उठे सवालों पर डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने नहीं रोका है, जबकि सरकार दो या एक बच्चे की नीति पर जोर देती है।
हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर उन्होंने कहा—
“देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। भारत में विविधता है, अलगाव नहीं।”


भारत की प्रगति से कुछ विदेशी शक्तियां असहज

सरसंघचालक ने कहा कि आज भारत के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं, लेकिन चुनौतियां भी मौजूद हैं। कुछ विदेशी शक्तियां भारत की प्रगति नहीं चाहतीं, क्योंकि उन्हें अपनी ‘दुकान’ बंद होने का डर है। वे भारत के विकास में बाधाएं खड़ी कर रही हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता को डर और कमजोरी से बाहर निकलने का स्थायी समाधान बताया।


इतिहास से सबक: फूट से हुआ था पराधीनता

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत कभी किसी विदेशी ताकत से सीधे नहीं हारा, बल्कि हमारी आपसी फूट का फायदा उठाकर हमें पराधीन बनाया गया। यदि समाज में सद्भाव रहेगा, तो लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनेंगे और समस्याएं खुद-ब-खुद हल होती जाएंगी।


समाज जाग रहा है, स्थानीय स्तर पर समाधान जरूरी

उन्होंने कहा कि आज समाज जाग रहा है और देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि प्रखंड और गांव स्तर पर लोग अपनी समस्याओं पर मिलकर विचार करें तो उन्हें किसी नेता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कार्यक्रम में क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह, क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन और उत्तर बिहार प्रांत संघचालक गौरीशंकर प्रसाद समेत कई वरिष्ठ स्वयंसेवक मौजूद रहे।


सज्जन शक्ति से आगे बढ़ रहा देश

प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. भागवत ने कहा कि केवल समस्या बताना काफी नहीं, समाधान भी देना चाहिए। आज देश ‘सज्जन शक्ति’ के भरोसे आगे बढ़ रहा है, जहां लोग अपने स्तर पर समाज की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।


सेवा भाव से ही होगा समाज का उत्थान

उन्होंने कहा कि समाज और जाति संगठनों को प्रखंड स्तर पर भौतिक और नैतिक उत्थान पर गंभीरता से काम करना होगा। सेवा केवल संपन्न लोग ही नहीं, बल्कि हर वह व्यक्ति कर सकता है जिसके मन में सद्भाव है।


सामाजिक संगठनों के कार्यों की प्रस्तुति

गोष्ठी में कई सामाजिक संगठनों ने अपने कार्यों की जानकारी दी।

  • तैलिक साहू समाज ने कोरोना काल में सेवा कार्यों का उल्लेख किया।
  • कुछ संगठनों ने सामूहिक विवाह आयोजन की जानकारी दी।
  • सहरसा के रोटी बैंक ने दिव्यांग और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने के प्रयास साझा किए।

यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष में सामाजिक एकता और सेवा भावना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ।

साभार…

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