Respect: नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय सेना ने हजारों जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCO) और नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स (NCO) को उनकी लंबी, निष्ठावान और अनुकरणीय सेवा के लिए ऑनररी रैंक से सम्मानित किया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी तीन गजट नोटिफिकेशन के तहत यह मानद पदोन्नतियां घोषित की गई हैं।
1️⃣ एक्टिव सर्विस पर ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट
गजट नोटिफिकेशन संख्या 01 (ई) के अनुसार,
- 437 वरिष्ठ JCO को ऑनररी कैप्टन
- 1804 JCO को ऑनररी लेफ्टिनेंट बनाया गया है।
ये सभी सैनिक आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, इंटेलिजेंस, मिलिट्री पुलिस, पायनियर कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी जैसी शाखाओं से हैं। इनका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह संतोषजनक रहा और किसी पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी।
2️⃣ रिटायरमेंट पर ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट
गजट नोटिफिकेशन संख्या 02 (ई) के तहत
- 4014 JCO को रिटायरमेंट के समय ऑनररी कैप्टन या लेफ्टिनेंट की मानद रैंक दी गई है।
इनमें सूबेदार मेजर, रिसालदार मेजर और सूबेदार स्तर के वे सैनिक शामिल हैं, जिन्होंने वर्षों तक सेना की अलग-अलग यूनिटों और रेजीमेंटों में सेवा दी।
3️⃣ ऑनररी नायब रिसालदार और ऑनररी सूबेदार
गजट नोटिफिकेशन संख्या 03 (ई) के अनुसार
- 805 NCO (हवलदार, दफेदार, नायब सूबेदार) को ऑनररी नायब रिसालदार या ऑनररी सूबेदार की मानद रैंक दी गई है।
ये सैनिक लंबे समय तक सीमावर्ती इलाकों, फील्ड एरिया और ऑपरेशनल यूनिट्स में तैनात रहे हैं।
क्या होती है ऑनररी रैंक?
ऑनररी रैंक भारतीय सेना का एक मानद सम्मान है, जो उत्कृष्ट सेवा, अनुशासन और समर्पण के लिए दिया जाता है।
यह रैंक कमांड या ऑपरेशनल पावर नहीं देती, लेकिन सैनिक की पूरी सेवा को आधिकारिक मान्यता प्रदान करती है। यह सम्मान आमतौर पर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर दिया जाता है।
ऑनररी रैंक के फायदे
- पेंशन में बढ़ोतरी:
7वें वेतन आयोग और OROP के तहत पेंशन ऊँची रैंक के अनुसार तय होती है। इससे पेंशन में लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। - सामाजिक और प्रोटोकॉल सम्मान:
सैनिक अपने नाम के साथ ऑनररी रैंक लगा सकते हैं – जैसे ऑनररी कैप्टन या ऑनररी सूबेदार। सरकारी और सैन्य आयोजनों में उन्हें अधिक सम्मान और प्राथमिकता मिलती है। - मेडिकल और कैंटीन सुविधाएं:
ECHS मेडिकल स्कीम, CSD कैंटीन और यात्रा रियायतें पहले की तरह जारी रहती हैं, कुछ मामलों में प्रोटोकॉल स्तर भी बेहतर होता है। - साभार….
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