ऑरो का पानी सप्लाई होने से बिक्री में आई गिरावट
वाजिद खान
Mats: बैतूल। गर्मी का मौसम अब पूरी तरह से शुरू हो चुका है और शहर में देसी फ्रिज, यानी मटकों की दुकानें सजने लगी हैं। लेकिन समय के साथ-साथ इन मटकों की कीमतों में इजाफा होने के बावजूद, शहर में मटकों की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इसका मुख्य कारण शहर में कैंपर से आरो का पानी सप्लाई होना है, जिससे अब लोग मटकों को कम ही खरीद रहे हैं।
मटकों की बढ़ी कीमतें

पिछले कुछ वर्षों में मटकों की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। अब देसी फ्रिज की कीमतें 150 रुपए से लेकर 500 रुपए तक पहुंच चुकी हैं। बाजार में विभिन्न प्रकार के मटके उपलब्ध हैं जैसे नल वाले मटके, गोल मटके, मिट्टी के सुरई वाले मटके और सफेद पीओपी के मटके, जो दुकानों में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन मटकों का उपयोग गर्मियों में पानी ठंडा करने और ताजगी बनाए रखने के लिए किया जाता है, लेकिन फिर भी बिक्री में कमी आ रही है।
मटके का पानी क्यों है पसंद?

हालांकि, आज भी कुछ लोग मटकों का पानी पीने को प्राथमिकता देते हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और शुद्ध होता है। इसमें किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है और यह शरीर के लिए बिल्कुल सुरक्षित माना जाता है। इस कारण से कई लोग मटके का पानी पीने को ही तरजीह देते हैं, लेकिन इसके बावजूद इनकी बिक्री में गिरावट हो रही है।
दुकानदारों की यह है परेशानी
दुकानदारों के लिए यह स्थिति काफी मायूस करने वाली है। बैतूल में मटकों की दुकान लगाने वाली महिला आशा प्रजापति, जो लगभग 20 वर्षों से इस व्यापार में हैं, उन्होंने बताया कि इस साल उनका व्यापार काफी ठंडा चल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले, 2018-19 के दौरान, दिन भर में लगभग 30 से 40 मटके बिकते थे, लेकिन इस वर्ष बिक्री घटकर सिर्फ 10 रह गई है। आशा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से ही मटकों की बिक्री में गिरावट आनी शुरू हो गई थी, लेकिन जब से शहर में आरो का पानी सप्लाई होना शुरू हुआ है, तब से मटकों की बिक्री में और अधिक कमी आई है। यह स्थिति दुकानदारों के लिए काफी मुश्किलों भरी है, क्योंकि उनकी आमदनी पर इसका सीधा असर पड़ा है।
कैंपर से हो रहा आरो का पानी सप्लाई
पानी की स्वच्छता और शुद्धता के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी मटकों की बिक्री में कमी का कारण बनी है। अब शहर में आरो का पानी घर-घर पहुंचाया जा रहा है, जो मटके के पानी की तुलना में अधिक सुविधाजनक और तुरंत उपलब्ध है। इसके चलते लोगों ने मटकों की बजाय आरो का पानी पीना शुरू कर दिया है, जिससे दुकानदारों की परेशानी और बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में मटकों की बिक्री में और गिरावट आ सकती है, और यह व्यापार धीरे-धीरे खत्म हो सकता है। यहां यह सवाल भी उठता है कि क्या मटकों का पारंपरिक तरीका धीरे-धीरे इतिहास बन जाएगा, या फिर लोग एक बार फिर से मटके का पानी अपनाएंगे, जो शरीर के लिए लाभकारी और स्वच्छ माना जाता है। फिलहाल, दुकानदारों को यह उम्मीद है कि भविष्य में इस पारंपरिक व्यापार को एक नई दिशा मिलेगी और मटके की बिक्री में वृद्धि होगी।
Leave a comment