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Dev Shayani Ekadashi – जून में बंद हो जाएगें सभी मांगलिक कार्य, और चार महीने नहीं होंगे विवाह

Dev Shayani Ekadashiऐसे लोगों के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है कि हरिशयनी ग्यारस इसी महीने में जगन्नाथ रथ यात्रा के बाद आती है। इस ग्यारस के बाद से ही सभी हिंदू धर्म मानने वाले लोग ये चार महीने में यानी की प्रबोधिनी एकादशी तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करते है।

क्या महत्व है देवशयनी ग्यारस का | Dev Shayani Ekadashi

चातुर्मास शुरू हो चुका है, और इसी महीने में आने वाली आषाढ़ शुक्ल पक्ष की ग्यारस की तिथि को चार महीने के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते है। और यही कारण है कि इस ग्यारस को देवशयनी ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है।

इस तिथि से हिंदू धर्म मानने वालों के लिए सभी प्रकार के मांगलिक कार्य भी बंद हो जाते है। और आइये अब हम यह भी जानते है कि देवशयनी ग्यारस का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा है, और देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व क्या है…

कब आती है देवशयनी ग्यारस

भारतीय पंचांग के मुताबिक आषाढ़ मास तो शुरू हो चुका है। लेकिन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते है। ऐसे में शुक्ल पक्ष की यह एकादशी भी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है।

इस तिथि की शुरुआत 29 जून गुरुवार सुबह 3 बजकर 8 मिनट से प्रारंभ हो रही है और यह तिथि 30 जून 2 बजकर 42 मिनट पर इसकी समाप्ति भी हो रही है। यह व्रत 29 जून को रखा जाएगा। इस व्रत के पारण का समय शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर 8 बजकर 43 मिनट तक ही रहेगा।

कुछ भारतीय पंचांग में पारण का समय 30 जून को दोपहर 1 बजकर 48 मिनट से शुरू होगा तो वहीं शाम 4 बजकर 36 मिनट तक बताया गया है। वहीं 29 जून को हरिशयनी एकादशी पर भगवान की पूजा का समय 10 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक बताया गया है।

देवशयनी ग्यारस से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं | Dev Shayani Ekadashi

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु जगत के पालक हैं, शुभ कार्य के लिए इनका जाग्रत अवस्था में होना बहुत ही जरूरी माना गया है और देवशयनी ग्यारस के दिन से ये योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस अवधि में सारे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।

अब ये काम प्रबोधिनी एकादशी को भगवान के जागने पर ही सभी मांगलिक कार्यो की शुरूआत होंगी। आपको यह भी बता दें कि देवशयनी ग्यारस जगन्नाथ यात्रा के बाद ही आती है।

और देवशयनी एकादशी से प्रबोधिनी एकादशी तक यानी की देवउठनी ग्यारस तक शादी विवाह, मुंडन, व्रतबंध जैसे सभी प्रकार के मांगलिक कार्य भी बंद कर दिए जाते हैं। और मान्यता यह भी है कि इस समय ये कार्य करने से इनमें कोई न कोई विघ्न जरूर आते है।

क्या महत्व है देवशयनी ग्यारस का

हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक देवशयनी ग्यारस पर स्नान दान का भी एक अपने आप में विशेष महत्व रखता है। और इस समय गोदावरी नदी में स्नान करना सबसे पुण्य फलदायी माना गया है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी विशेष तौर पर पूजा-पाठ करनी चाहिए, क्योंकि यह शुभ फलदायक और सुख समृद्धि बढ़ाने वाला होता है।

Source – Internet

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