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Sun Temple – भारत के ये सात बड़े सूर्य मंदिर जहां हर समय बरसता सूर्य देवता का आशीर्वाद

Sun Templeभारत में स्थित ये सात बड़े सूर्य देवता के मंदिर है जहां हर पर पल-पल में बरसता है भगवान का आशीर्वाद। जो कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार ऊर्जा के केंद्र बिन्दु माने जाने वाले भगवान सूर्य के देशभर में कई जगह पर ऐसे-ऐसे मंदिर हैं, जो न सिर्फ लोगों की आस्था के लिए बल्कि अपनी भव्यता और खूबसूरती के लिए भी जाने जाते पहचाने जाते हैं।

यह बात ग्रंथों के अलावा बिज्ञान ने भी साबित कर दी है | Sun Temple

सूर्य देव का हर व्यक्ति के जीवन में कितना ज्यादा महत्व है, यह बात किसी ग्रंथों ओर पुराणों में ही नहीं, बल्कि विज्ञान ने भी ये बात को सही साबित कर दिया है। चूंकि, सूर्य यानी भगवान सूर्य भारत के नौ ग्रहों में से एक हैं, हर व्यक्ति के जीवन में इसके महत्व को समझते हुए ही शायद सूर्य मंदिरों का निर्माण हुआ है।

वहीं, रोजाना सुबह दर्शन देने वाले सूर्य देव के देश भर में कई ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिसे देखने के लिए लोग देश-विदेश से भी यहां पर आते हैं। जिसमें ओडिशा के कोणार्क का सूर्य मंदिर से लेकर गुजरात के मोढ़ेरा में स्थित सूर्य मंदिर में आध्यात्मिक राज छिपे हुए है।

तो हम आपको देश के सात ऐसे प्रमुख सूर्य मंदिर के बारे में बताते है। जिसमें हिन्दु धार्मिक मान्यता यह है कि, सूर्य देव की पूजा करने से मान-सम्मान, प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। ओर ऐसा करने से जीवन की असफलताओं को सूर्य देव सफलता में परिवर्तीत भी कर देते हैं।

सूर्य मंदिर – कोणार्क

भगवान सूर्यदेव के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है कोणार्क जो सबसे पहले आता है। वहीं, ओडिशा में स्थित कोणार्क के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर देशभर में जाना जाता है। माना यह भी जाता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के बेटे साम्ब ने की थी।

उसके बाद से ही इस सूर्य मंदिर का निर्माण राजा नरसिंहदेव ने 13वीं शताब्दी में करवाया था। वहीं, मंदिर अपने विशिष्ट आकार और शिल्पकलाओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। हालांकि, इस मंदिर की खासियत यह भी है कि सूर्योदय की पहली किरण मंदिर के मेन गेट से टकराती है।

सूर्य मंदिर – औरंगाबाद

बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित भगवान सूर्यदेव का एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जिसके द्वार पूर्व की बजाय पश्चिम की ओर है। और जहां पर सात रथों पर सवार भगवान सूर्यदेव के तीनों स्वरूपों के भी दर्शन किये जा सकते हैं। हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस सूर्य मंदिर का गेट एक रात में अपने आप दूसरी दिशा की ओर बदल गया था।

सूर्य मंदिर – मोढेरा

वहीं पर, गुजरात में स्थित मोढेरा के सूर्य मंदिर अपनी स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है। जिसे सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने सन् 1026 ई। में बनवाया स्थापित करवाया था।

और यह भी बता दें कि, मोढेरा का यह सूर्य मंदिर दो हिस्से में बना हुआ है, जिसमें पहला हिस्सा गर्भगृह का है और दूसरा सभामंडप का है। वहीं, मंदिर का निर्माण ऐसा किया गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह में ही पड़ती हैं।

मार्तंड मंदिर – कश्मीर

वहीं संपूर्ण देशभर में प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में कश्मीर में स्थित मार्तंड मंदिर काफी जाना जाने वाला मंदिर है। यह मंदिर कश्मीर के दक्षिणी भाग में अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में मार्तण्ड नामक जगह पर स्थित है। वहीं हिन्दु धार्मिक मान्यता यह भी है कि, इस मंदिर को आठवीं सदी में कारकोटा वंश के राजा ललितादित्य ने इसका निर्माण करवाया था।

सूर्यनारायण मंदिर – आंध्र प्रदेश

वहीं आंध्रप्रदेश के अरसावल्ली गांव से करीब 1 किमी पूर्व दिशा में भगवान सूर्य का लगभग 1300 साल पुराना भव्य मंदिर है। यहां पर भगवान सूर्य नारायण अपनी पत्नियों उषा और छाया के साथ विराजमान है और यहां पर भगवान सूर्य नारायण और उनकी पत्नियों के साथ विशेष रूप से पूजे जाते हैं।

इस मंदिर की खासियत है यह भी है कि यहां पर साल में दो बार सीधे मूर्ति पर सूर्य की पहली किरण पढ़ती है। और यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर में सूर्यदेव के दर्शन करने मात्र से सुख और सौभाग्य मिलता है।

सूर्य मंदिर बेलाउर – बिहार

ये है बिहार के भोजपुर जिले के बेलाउर गांव के पश्चिमी एवं दक्षिणी छोर पर स्थित बेलाउर का सूर्य मंदिर जो की काफी पुराना है, और जिसे राजा द्वारा बनवाए 52 पोखरों में से एक पोखर के बीच में यह सूर्य मंदिर बना हुआ है। कहा जाता है कि अगर कोई भी भक्त सच्चे मन से इस स्थान पर छठ व्रत की विधि विधान के साथ पूजा-पाठ करते है तो उनकी सभी मनोकामनाएं अवश्य ही पूरी होती हैं।

सूर्य मंदिर – झालरापाटन

वहीं पर राजस्थान के झालावाड़ में स्थित दूसरा जुड़वा शहर झालरापाटन को सिटी ऑफ वेल्स यानी घाटियों के शहर के नाम से भी जाना पहचाना जाता है । जहां शहर के बीचों बीच स्थित सूर्य मंदिर झालरापाटन का दर्शनीय स्थल है। वहीं, इस मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी में मालवा के परमार वंशीय राजाओं ने करवाया था। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है।

Source – Internet

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